किसान आंदोलन: किसानों के साथ बलपूर्वक छल करने की कोशिश।

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तीन फार्म बिल के खिलाफ काफी लंबे समय से किसान आंदोलन जारी है और इस आंदोलन को कभी किसी पॉलिटिकल पार्टी का समर्थन मिलता है और कभी किसी पार्टी का विरोध मिलता है। हालाकी, अपने हक के लिए लड़ रहे किसानों का आंदोलन अभी भी जारी है। केंद्र सरकार का प्रयास है कि यह आंदोलन जल्द से जल्द खतम हो, जिसके तहत कोरोना जैसी समस्या को मद्देनजर रखते हुए भी इस आंदोलन को खतम करने की अपील की थी।

बलपूर्वक छल करने की कोशिश

  • इसी की उपलक्ष्य में झुंझुनू जिले के ढिगाल टोल बूथ पर चल रहे किसान आंदोलन को जिला प्रशासन ने बंद करवा दिया है। यह आंदोलन जिला प्रशासन द्वारा बलपूर्वक बंद करवाया गया है जिसके तहत किसानो की गिरफ्तार भी किया गया है।
  • यह किसान आंदोलन, धारा 144 का हवाला देते हुए बंद करवाया गया है।
  • हालाकि, देश कि वर्तमान स्थित को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले से ही जिले में कई टोल बंद करवा दिया थे और प्रदर्शन दे रहे किसानों की संख्या भी कम कर दी थी। किसान कानून के खिलाफ प्रदर्शन कोरोना गाइडलाइन का अनुसरण करते हुए ही किया जा रहा है।
  • झुंझुनू जिला प्रशासन की इस रवैया की तुलना वर्तमान सरकार से करते हुए आलोचना की जा रही है।

विपक्ष दल कई बार किसान आंदोलन के समर्थन में उतरा है और साथ में धरना भी दिया है अपितु झुंझुनू जिला प्रशासन का इस प्रकार का रवैया यह दर्शाता है दोनों पक्ष और विपक्ष एक ही तर्ज़ पर हैं। इस घटना को लेकर विभिन्न नेताओं और किसान नेताओं ने विरोध किया और कहा की आंदोलन करना किसानों का लोकतान्त्रिक अधिकार है जिसे उनसे कोई नहीं छीन सकता है, अपने हक में लड़ी जा रही किसानों की इस लड़ाई को कोई रोक नहीं सकता और वे इसी प्रकार एक साथ आकर अपना विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।

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