आम आदमी पार्टी के दिल्ली एमसीडी चुनाव में हारने की पांच सबसे बड़ी कमियां जानने के लिए देखें..

393

5 reasons for AAP debacle in MCD elections

नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में मतगणना सुबह से शुरू हो चुकी है. अभी तक हुई काउंटिंग के अनुसार बीजेपी प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है तो वहीं आम आदमी पार्टी दूसरे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर फिसलती नजर आ रही हैं.

भारतीय जनता पार्टी एमसीडी में फिलहाल 181 सीटों वार्ड पर आगे है तो वहीं आम आदमी पार्टी 40 सीटों पर और कांग्रेस 38 सीटों पर आगे चल रही हैं. साल 2015 के विधानसभा चुनावों में आप को मिली शानदार जीत के बाद यह कहा जा रहा था कि पार्टी अगले दो सालों में कुछ ऐसा काम करेगी कि एमसीडी में भी उसे शानदार जीत मिलेगी, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है.

इतना ही नहीं दिल्ली एमसीडी चुनावों में मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं की ओर से ऐसे बयान आ रहे हैं जो बेहद ही चौंकाने वाले हैं. आप नेता गोपाल राय और आशुतोष ने हार का ठीकरा ईवीएम मशीन पर फोड़ा है. उनका कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से बीजेपी जिती और आप हारी है.

हार के बाद हर पार्टी अपनी तरफ से सफाई पेश करती ही है, लेकिन अगर पिछले कुछ महीनों की आप की गतिविधियों पर नजर डाली जाए तो पार्टी के हार के पांच बड़े कारण सामने आ रहे हैं.

1. केजरीवाल का ‘डेंगू-चिकनगुनिया’ वाला बयान…..

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली एमसीडी चुनाव से महज दो रोज पहले ही एक ऐसा बयान दिया जाना था, जिसकी वजह से सम्पूर्ण दिल्ली और पूरे भारत भर में उनकी काफी आलोचना हुई थी जिसका बदला जनता ने एमसीडी में वोट नहीं देकर लिया, केजरीवाल ने जनता से कहा था कि “अगर कल को आपके घर में डेंगू हो जाए तो इसके लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे क्योंकि आपने बीजेपी को वोट दिया है”.

अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर बीजेपी को डेंगू और चिकनगुनिया वाली पार्टी करार देते हुए दिल्लीवासियों से कहा था कि अगर आपने बीजेपी को वोट दिया तो 5 साल तक कूड़ा, मछर ऐसे ही रहेंगे. केजरीवाल के इस बयान के बाद से उनकी काफी आलोचना हो रही थी. जाहिर सी बात है कि इस तरह के बयान की वजह से केजरीवाल को जनता का साथ नहीं मिल सकता था.

2. ईवीएम टेंपरिंग का मुद्दा…..

पिछले दिनों ही पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम में गड़बड़ी होने का मुद्दा बहुत ही जोर-शोर से उठाया था, लेकिन इस मुद्दे को एमसीडी चुनाव में जरूरत से ज्यादा तूल देना केजरीवाल के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ.

केजरीवाल ने चुनाव प्रचार में जमीनी स्तर के मुद्दे न उठाकर ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे को ज्यादा हवा दी. ऐसा करना उनके लिए गलत साबित हुआ.

3. पीएम मोदी पर केंद्रित प्रचार करना घाटे का साबित होना….

अरविंद केजरीवाल ने एमसीडी चुनाव प्रचार के दौरान लगातार ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व पर हमला किया था. उन्होंने जमीनी स्तर के मुद्दों को जनता के सामने न रखकर पीएम मोदी के खिलाफ प्रचार किया, ऐसा करना एक तरह से पीएम मोदी और बीजेपी के लिए सकारात्मक साबित हुआ, क्योंकि भले ही प्रचार नकारात्मक था, लेकिन समय समय पर जनता के सामने बीजेपी और पीएम मोदी का नाम केजरीवाल खुद ही लेते रहे. केजरीवाल ने यहां जनता का ध्यान जरूरी मुद्दों पर केंद्रित करना सही नहीं समझा, जो उन्हें काफी भारी पड़ गया.

5 reasons for AAP debacle in MCD elections

4. राज्यपाल से जंग…..

दिल्ली के एलजी भले ही वह नजीब जंग थे या वर्तमान एलजी अनिल बैजल, दोनों से ही अरविंद केजरीवाल की बनी नहीं. जंग से तो केजरीवाल की बहुत से मुद्दों पर तनातनी रहती थी तो वहीं राज्यपाल अनिल बैजल से भी केजरीवाल की कोई खास नहीं बनी.लगातार आये दिन राज्यपाल से झगड़ा करना और हर मुद्धे पर राज्यपाल एवं पीएम को जिम्मेदार टहराना.

बैजल ने केजरीवाल के विज्ञापन प्रोजेक्ट पर खर्च को लेकर जांच बैठा दी था, साथ ही साथ बैजल ने मुख्य सचिव को दिल्ली सरकार से विज्ञापन पर खर्च किए 97 करोड़ रूपये वसूलने का आदेश भी दे दिया था.

5. आरोपों की राजनीति….

आम आदमी पार्टी ने आरोपों की राजनीति भी बहुत की. केजरीवाल ने पिछले दो साल के कार्यकाल में लगातार यही बात कही कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है या केंद्र सरकार उनके कामों में अड़ंगा बन रही है.

केजरीवाल ने हमेशा से ही हर अधूरे काम का ठीकरा केंद्र सरकार के सिर पर फोड़ा. एक तरफ जहां उन्होंने यह कहा कि केंद्र काम नहीं करने दे रहा तो वहीं दूसरी तरफ यह भी कहते आए हैं कि दिल्ली में आप सरकार ने दो साल में जितना अच्छा काम किया है उतना अच्छा काम किसी भी सरकार ने नहीं किया. केजरीवाल सरकार की ये दोनों बातें ही एक-दूसरे की विरोधी हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here