केजरीवाल के करीबी आशीष खेतान ने दिया दिल्ली डायलॉग कमीशन के VC पद से इस्तीफा

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नई दिल्ली- उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद बीते मंगलवार को दिल्ली सरकार के मंत्रियों के 9 सलाहकारों को हटाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। उपराज्यपाल का कहना था कि इन सभी को गलत तरीके से नियुक्त किया गया था। नियुक्तियों के लिए केंद्र से मंजूरी नहीं ली गई। इस फैसले का AAP नेताओं ने विरोध करना भी शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के करीबी नेता आशीष खेतान ने दिल्ली डायलॉग कमीशन के वाइस चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया है।

खेतान ने इस्तीफे में दिल्ली सीएम केजरीवाल का धन्यवाद ज्ञापित कर कहा कि केजरीवाल ने उनको ये बड़ी जिम्मेदारी दी थी, जिसको उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की और इस कार्यकाल के दौरान उनको दिल्ली की जनता से जुड़ने का मौका मिला। पत्रकारिता क्षेत्र से नेता बने खेतान को सीएम केजरीवाल का विश्वास पात्र माना जाता है, उन्हें 3 साल पहले आप सरकार की सलाहाकर इकाई डीडीसी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। केजरीवाल दिल्‍ली डायलॉग कमीशन के अध्यक्ष है।

खेतान ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘मैंने डीडीसी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जो 16 अप्रैल से प्रभावी है. पिछले तीन वर्षों में मुझे सार्वजनिक नीति को आकार देने एवं शासन में सुधार तथा परिवर्तन लाने के लिए कई अनोखे अवसर मिलें, मुझे यह अवसर देने के लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का शुक्रगुजार हूं.’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘मैं कानूनी पेशे से जुड़ रहा हूं और दिल्ली बार में पंजीकरण करा रहा हूं जिसकी वजह से डीडीसी से इस्तीफा देना आवश्यक है. बार काउंसिल के नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति वकालत करते समय निजी या सरकारी नौकरी नहीं कर सकता.’

खेतान ने अपने फेसबुक पर लिखा…

https://www.facebook.com/AshishKhetanAAP/posts/1398673516905604

दरअसल आम आदमी पार्टी ने साल 2014 के दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के दौरान जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली डायलॉग नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया था। AAP का ये कार्यक्रम एक तरह सफल रहा था और लोगों का भी इसमें भरपूर समर्थन मिला था। विधानसभा चुनाव के बाद भी AAP ने इस कार्यक्रम को जारी रखा और इसका नाम ‘दिल्ली डायलॉग कमीशन’ कर दिया गया। उस वक्त आशीष खेतान को इसका वाइस चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

इस फैसले से आने वाले दिनों में दिल्ली व केंद्र सरकार के बीच एक बार फिर टकराव ओर बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। AAP नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

केंद्र सरकार की साजिश…

उपराज्यपाल के इस फैसले को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की साजिश करार दिया है। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि ये नियुक्तियां बिना पद के की गई थी और यदि सरकार सही है तो जुबानी बयानबाजी करने के बजाय इस फैसले को अदालत में चुनौती दे।

गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना हुईं नियुक्तियां…

उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा है कि यह नियुक्तियां बिना गृह मंत्रालय की मंजूरी के की गई थीं। वहीं, दिल्ली सरकार का दावा है कि इन सभी सलाहकारों की नियुक्ति की मंजूरी उपराज्यपाल ने ही दी थी। इससे पहले भी घर तक राशन पहुंचाने की योजना को मंजूरी नहीं देने को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह राज्य की सरकार को काम नहीं करने देना चाहते हैं।

हटाए गए लोगों के नाम और पद…

  1. आतिशी मरलेना : उपमुख्यमंत्री की सलाहकार
  2. राघव चड्ढा : वित्त मंत्री के सलाहकार
  3. अमरदीप तिवारी : कानून मंत्री के मीडिया सलाहकार
  4. प्रशांत सक्सेना : ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, उद्योग और गृह मंत्री के सलाहकार
  5. समीर मल्होत्रा : ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, उद्योग और गृह मंत्री के सलाहकार
  6. रजत तिवारी : ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, उद्योग और गृह मंत्री के कैंप ऑफिस में सलाहकार
  7. रामकुमार झा : सामान्य प्रशासन मंत्री के सलाहकार
  8. ब्रिगेडियर दिनकर अदीब : ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी और गृह मंत्री के ओएसडी
  9. अरुणोदय प्रकाश : उपमुख्यमंत्री के सलाहकार

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