ठप्प पड़ी है केंद्र के कब्जे वाली दिल्ली की ACB : RTI से खुलासा

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दिल्ली : शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री होते हुए तथा उससे पहले दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच दिल्ली की चुनी हुई सरकार के प्रति जवाबदेह होती थी, और ये ब्रांच उस वक्त काफी चर्चा में रही थी जब अरविन्द केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे, मात्र 49 दिन के कार्यकाल में उन्होंने कई बेईमानो को सलाखों के पीछे करवा दिया था |

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2 साल पहले केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के आदेश के जरिये दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच पर अपना कब्जा कर लिया और कहा की ये एक थाना है जो केंद्र के अधीन होगा, ऐसे में ये दिल्ली की चुनी हुई सरकार के आदेश मानने को बाध्य नही है |

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दिल्ली की ACB केंद्र के बेईमानो को करने लगी थी गिरफ्तार , तब किया गया था कब्जा |

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भ्रष्टाचार विरोध पर बनी आम आदमी पार्टी की सरकार की एक महत्वपूर्ण शक्ति को उनसे षड्यंत्र के तहत छीन लिया गया था, अब देखिये वर्तमान में इस ब्रांच का हाल कितना बुरा है |

ACB a shell of its former self, reveals RTI query

पिछले दो साल से एंटी करप्शन ब्रांच कुछ भी खास नही कर पाई है और ना ही किसी प्रकार का भ्रष्टाचार रोकने में कामयाब हुई है , दा हिन्दू के पत्रकार जतिन आनंद ने सूचना का अधिकार के जरिये दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच से जुडी जानकारी हासिल की है जिसमे चौकाने वाले खुलासे हुए है |

आरटीआई के जवाब में दिए गए आंकड़ों से पता चला कि एसीबी के मूल कार्यों का शायद कोई पहलू नहीं था जिसने इस साल 31 मार्च तक भारी कमी दर्ज नहीं की थी। अपनी वर्तमान औसत गिरफ्तारी दर की तुलना में, एसीबी अब एक दशक पहले अधिक कथित भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों को पकड़ रहा था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जो पहले इकाई में सेवा करता था, ने कहा कि एसीबी अब “पिछले कुछ वर्षों में गृह मंत्रालय द्वारा द्वारा ACB के पंख कतर दिए गए हैं’ | साल 2015 के मध्य तक, एलजी के तहत दिल्ली सरकार और विभागों के सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ पूछताछ करने की शक्ति के अलावा, दिल्ली पुलिस जैसे विभागों में तैनात अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करने की शक्ति ACB में थी।

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