एएसईआर की रिपोर्ट: 14-18 साल के 76 फीसदी स्टूडेंट नहीं गिन पाते पैसे, रिपोर्ट में हुए और भी बड़े खुलासे…

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दिल्लीएनुअल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन (एएसईआर) की रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल में पढ़ने वाले 14-18 साल के आयु वर्ग के बच्चों को लेकर रिसर्च हुई। जिसमें जो आंकड़े मिले वो एकदम ही चोंकाने वाले आये है, ज़िन्हें देखकर एक बार तो आपके भी पेरों तले ज़मीन खिसक ही जायेंगी क्योंकी एएसईआर से मिले आंकड़ों के अनुसार कई बडे बातें सामने आई हैं।
जिसके अनुसार सर्वें में शामिल संख्या से करीब एक चौथाई बच्चे अपनी मातृ भाषा को बिना रुके फ्लुएंटली नहीं पढ़ सकते हैं। जबकि, 57 फीसदी बच्चे साधारण जोड़, बाकी, गुणा और भाग भी ठीक से करने में सक्षम नहीं मिले हैं। और वहीं, करीबन 76 फीसदी स्टूडेंट सही से पैसे भी नहीं गिन पाते है।
आपको बता दें कि एएसईआर-2017 की रिपोर्ट में देश के 24 राज्यों की 28 जिलों को शामिल किया गया था। वहीं इस सर्वे में 2000 वॉलेंटियर ने हिस्सा लिया था। ये वॉलेंटियर 1641 गांवों के 25 हजार घरों में गए थे। इन्होंने 14-18 साल के बच्चों से सवाल पूछें थे।

एएसईआर

सर्वे एएसईआर-2017 में ये हुए खुलासे…

सर्वे एएसईआर -2017 में कई अहम और चोंकाने वाले खुलासे हुए है। जिसके अनुसार स्कूलों में पढ़ने वाले 14-18 साल के 76फीसदी अधिकांश बच्चों को पैसे की गिनती नहीं आती।

समय और वजन की जानकारी नहीं है। करीब 44 फीसदी बच्चे किलोग्राम को वजन में नहीं बता पाए। समय देखना तो रोजाना की बात है जो रोज की दिनचर्या में शामिल है। लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे घंटा और मिनट के बारे में तक नहीं बता पाए।

मैप पढ़ना भी नहीं जानते…

  • रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात ये भी है कि सर्वें मे शामिल स्टूडेंटस के 14 फीसदी बच्चों को जब देश भारत, उनके ही राज्यों का मैप दिखाया गया तो उन्हें उसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं था।
  • वहीं, 36 फीसदी बच्चों को देश और राज्यों की राजधानी के बारे में नहीं पता है।
  • भारत की ग्रामीण शिक्षा की दिखाती तस्वीर में ये भी निकलकर सामने आया कि 21 फीसदी बच्चों को अपने राज्य के बारे में कुछ नहीं पता है।

इससे यह जाहिर होता है कि वाकई में ग्रामीण शिक्षा की क्या स्थिति है और हमें इस ओर क्या करने की जरूरत है।

— मुख्य आर्थिक सलाहकार, अरविंद सुब्रमण्यम

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