जिला कांग्रेस का ”गौरव” बढ़ाने के बाद गठन, जम्बो टीम में पद के लिए लंगर लंगोटे कस दंड-बैठक निकालनी शुरु

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सीकर। कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए प्रदेश राजस्थान की सभी विधानसभा क्षेत्रों में “मेरा बूथ मेरा गौरव” कार्यक्रम करवाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा और आगामी इलेक्शन की तैयारियों की रणनीति के बारे में बताकर सभी को बूथवार जिम्मेदारी दे रहे है। इसी कर्म में सीकर जिले में भी कांग्रेस के विधानसभा वार “मेरा बूथ मेरा गौरव” कार्यक्रम हो रहे है, जिसके मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों से माना जा रहा है कि जिला कांग्रेस कमेटी के गठन का मामला अभी लटका रहेगा, लेकिन आशंका है कि कार्यकर्ता कहीं “गौरव” न खराब कर दे। इसके चलते जिला कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया को थोड़ा विलम्ब से करना ही ठीक रहेगा। और वैसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष पी.एस.जाट ने सभी आठों विधानसभा के वरिष्ठ नेताओं से ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम 30 मई तक देने को कहा था, जिनको जिला कार्यकारिणी में शामिल करवाना है, परन्तु किसी भी नेता ने अध्यक्ष को ऐसे नामों की फेहरिस्त नहीं थमाई।

इधर जिला कांग्रेस कमेटी में शामिल होने और पदोन्नति चाहने वाले वर्करों ने भी लंगर लंगोटे कस लिए और दंड-बैठक निकालनी शुरु कर दी। एक अदद पद की चाहत रखने वाला कार्यकर्ता नेताओं की चौखट पर मथा टेकने लगा है। जब तक उसकी मंशा पूरी नहीं होती, उसका पल-पल कटना मुश्किल हो रहा है।

दरअसल आपको बता दे कि पहले तो नये जिला अध्यक्ष बनने की कवायद काफी लंबी चली और अब कार्यकारणी को लेकर समय का अंतराल को लगातार बढाया जा रहा है। एक वरिष्ठ नेता ने इन सारी परिस्थियों पर कहा “करीब डेढ वर्ष के मंथन के बाद जैसा जिलाध्यक्ष बनाया गया है, उससे कौनसा अमृत निकला है, जो अब माथापच्ची कर के कार्यकारणी का गठन किया जायेगा। जो होना वह तो नेताओं की मनमर्जी है, फिर देर किस बात की।

इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव के देखते हुए कार्यकारिणी भी “जम्बो” ही होगी। जिसमें अध्यक्ष पद के अलावा 24 उपाध्यक्ष, एक संगठन महामंत्री, 21 महासचिव, 21 सचिव, 21 सह सचिव, एक कोषाध्यक्ष और 5 प्रवक्ता होगे। कुल मिलाकर खा जा रहा है कि लगभग 95 पदाधिकारियों की यह जिला कार्यकारिणी होगी और मजे की बात तो यह है कि पदों की भरपूर संख्या होने के बावजूद भी कार्यकारिणी में पद पाने वालों की मारामारी भी है। जिसमे रुतबे का पद लेने वालों की ताबडतोड़ कोशिशें दीगर है।

बहरहाल यह भी तय है कि विधानसभा के चुनाव लड़ने वाले मुख्य नेताओं की मर्जी से बने ब्लाॅक अध्यक्षों की तर्ज पर ही जिला कार्यकारणी में पदाधिकारी आयेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि कौन सा नेता, जिला कार्यकारणी में अपनों को कितना फिट करवा लेता है। फिलहाल जिला स्तरीय नेता का तमगा लगाने वाले कार्यकर्ता को पहले अभी “मेरा बूथ मेरा गौरव” को सफल बनाना है, तब जाकर वो जिला कांग्रेस का पदाधिकारी का तमगा लगा पायेगा।

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