राजस्थान में ‘आनंदपाल’ और ‘पद्मावत’ फैक्टर तय करेंगे उपचुनाव नतीजे!

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जयपुर- प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाले ‘आनंदपाल एनकाउंटर‘ और ‘पद्मावती‘ मुद्दों पर नाराज राजपूत समाज के वोटों पर सियासी गलियारों में कशमकश जारी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सत्ताधारी बीजेपी का सेमीफाइनल कहे जा रहे अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के नतीजे ये दोनों फैक्टर ही तय करेंगे। दरअसल, सरकार से नाराज राजपूत संगठनों ने उपचुनाव से पहले वसुंधरा सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगाते हुए कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की थी। अब 1 फरवरी को आने वाले उपचुनाव नतीजों में इसका असर दिख सकता है।

सत्ताधारी बीजेपी ने इन तीनों सीटों पर अपनी साख बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। वहीं कांग्रेस ने भी राजपूतों के समर्थन के बाद अपना खोया समर्थन वापस हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन दोनों ही पार्टियों के बीच अब भी यह सवाल परेशानी बढ़ाने वाले हैं कि राजपूत समाज की नाराजगी के बाद समर्थन किसे मिलेगा? क्या बीजेपी के परम्परागत राजपूत वोट लीक से हटकर कांग्रेस की झोली में गिरेंगे?

प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राजपूत समाज खासा चर्चा में है और चर्चा इस बात की हो रही है कि राजपूतों ने भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का दामन पकड़ लिया है। उपचुनाव में राजपूताना की सियासत राजपूतों को लेकर गर्माई हुई है। राजपूत समाज के विभिन्न संगठनों ने बीजेपी पर ‘आनंदपाल एनकाउंटर’ और ‘पद्मावत’ मामलों में उपेक्षा का आरोप लगा कर सियासत में उबाल ला दिया और उपचुनाव में कांग्रेस को पूर्ण समर्थन का ऐलान कर दिया।

राजस्थान में सेमीफाइनल के नतीजे?
‘आनंदपाल एनकाउंट’ और ‘पद्मावती’ मुद्दों से प्रभावित होंगे राजस्थान में सत्ता के सेमीफाइनल के नतीजे?

आनंदपाल प्रकरण में राजपूत सरकार से नाराज…

आनंदपाल प्रकरण को लेकर राजपूत संगठन की मांग थी कि आनंदपाल प्रकरण की सीबीआई जांच हो। राजपूत संगठनों का आरोप है कि सरकार ने हमारे ही खिलाफ जांच खोल कर राजपूत युवाओं को फंसाने का षड्यंत्र किया है। राजपूत और रावणा राजपूत इस अत्याचार का बदला लेंगे। जयपुर में इकट्‌ठा हुए संगठनों ने उपचुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा कर दी। राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने कहा कि आनंदपाल सिंह एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने की बात पर सरकार से वादा खिलाफी की। सरकार ने 18 जुलाई को राजपूतों से जो वादा किया था उसे नहीं निभाया है। दो एफआईआर पर सीबीआई जांच कराने की सहमति हुई थी लेकिन सरकार सभी एफआरआई पर सीबीआई जांच कराकर वादाखिलाफी कर रही है।

पद्मावत पर अंतिम समय तक निर्णय नहीं करने पर नाराजगी

राजपूतों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने 20 नवंबर को मौखिक रूप से फिल्म पर बैन लगाने की बात कही लेकिन 2 महीने तक इसकी घोषणा नहीं की। इस दौरान राजपूतों की नाराजगी और बढ़ती गई। हालांकि 17 जनवरी को सरकार ने अधिकारिक घोषणा करते हुए फिल्म पर बैन लगा दिया। लेकिन अगले ही दिन 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ‘पद्मावत’ के रिलीज को हरी झंडी दे दी। राज्य सरकार के फिर याचिका लगाई जिसे भी खारिज कर दिया गया।

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