नीति आयोग से अरविंद पनगढ़िया के जाने से पीएम मोदी की कई अहम योजनाओं को लग सकता है झटका

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नई दिल्ली। भारत देश में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया द्वारा अचानक अपने पद से इस्तीफा दे देने से आयोग की कई बड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर गहरा पड़ सकता है। आयोग के अधिकारियों के बताये अनुसार पनगढ़िया अधिकारिक थिंक टैंक की बड़ी योजनाओं पर काम कर रहे थे, जिनमें आने वाले 15 साल के लिए एक बड़ा विजन डॉक्युमेंट तैयार कर तटीय रोजगार जोन और विश्व लेवल की यूनिवर्सिटीज बनाना शामिल है। पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्याक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। वह इस महीने के अंत तक ऐकडेमिक्स में लौटने का विचार कर रहे हैं।

आयोग के अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा है कि जब तक पनगढ़िया का उत्तराधिकारी आकर पद संभालेगा और मौजूदा व्यवस्था में सेटल होगा तब तक एक खालीपन बना रहेगा।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जिन प्रॉजेक्ट्स को पनगढ़िया खुद संभाल रहे थे, वह उनके जाने से कुछ समय के लिए धीमे पड़ सकते हैं। रोजगार के लिए चीनी तट के पास विशेष जोन बनाने पर पनगढ़िया का खासा जोर था। उन्होंने खुद देश के लिए आने वाले 3 साल को ध्यान में रखते हुए एक ऐक्शन प्लान का ड्राफ्ट तैयार किया था। पनगढ़िया ने ईटी को बताया था कि ड्राफ्ट में सभी इनपुट्स को शामिल नहीं किया जा सका है और उसके बाद एक व्यापक विजन डॉक्युमेंट भी आएगा। इस स्ट्रैटिजी डॉक्युमेंट में रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और बैंकों के निजीकरण तक की बात शामिल होने की संभावना थी।

कई योजनाओं पर काम कर रहे थे पनगढ़िया….

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नीति आयोग में कई योजनाओं पर काम कर रहे थे अरविंद पनगढ़िया

फिलहाल, एशियन डिवेलपमेंट बैंक की एक टीम गुजरात और आंध्र प्रदेश में विशेष जोन बनाने के लिए विस्तृत योजना पर काम कर रही है। पनगढ़िया की शुरू हुई योजनाओं की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले उपाध्यक्ष की प्राथमिकताएं क्या होने वाली हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ‘वैसे तो अधिकतर काम प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ही आयोग को भेजे जाते हैं, फिर पनगढ़िया के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को सेटल होने में समय लगेगा। एक साल पहले ही आयोग जीवंत हुआ था जब उपाध्यक्ष और सीईओ ने सरकार की बड़ी योजनाओं पर जोर दिया था।’

 

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक अपने शुरुआती दिनों में पनगढ़िया को आंतरिक और बाहरी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपने विचारों को न सिर्फ सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचाया बल्कि उनमें से कई को सच भी किया।

आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान पनगढ़िया ने नए लोगों को मौके देकर भारत को बदलने की कोशिश की। सिंधुश्री खुल्लर के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स के सुझावों पर आयोग का नया ढांचा बनाने के लिए आयोग के कर्मचारियों की संख्या को 60 प्रतिशत पर ले आया गया। इसके लिए मध्य-स्तर और निचले स्तर के अधिकारियों को बाहर का रास्ता देखना पड़ा, जिसमें भारतीय आर्थिक सेवा के कई अधिकारी शामिल थे। लेकिन, पनगढ़िया ने बड़ी संख्या में कंसल्टेंट्स, OCD(ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) और नए प्रफेशनल्स को काम दिया।

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