NDA के साथ आने के बाद नीतीश कुमार का ये बड़ा सपना हुआ चकनाचूर

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पटना:- बिहार में पिछले कई दिनों से चल रहे सियासी राजनीतिक घमासान के बाद आखिरकार नीतीश  कुमार ने विधानसभा में अपनी बहुमत साबित करते हुए दोबारा से सरकार बना ही लिया. नीतीश के पक्ष में 131 विधायकों ने वोट किया, जबकि 108 विधायकों ने उनके खिलाफ वोट डाले।

लेकिन जहाँ एक तरफ नीतीश कुमार को वापस से मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने की खुशी हुई होगी, वहीँ दूसरी तरफ इसके लिए उन्हें एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है।

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टूट गया पीएम बनने का सपना-

दरअसल आरजेडी के साथ सरकार बनाने के बाद बिहार के सियासी गलियारों में ये चर्चा जोरो-शोरो पर थी की नीतीश कुमार 2019 में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उतर सकते हैं. लेकिन वहीँ अब महागठबंधन के टूटने के बाद नीतीश ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना लिया है और परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पूरी तरह से नरेंद्र मोदी को सौंप दी है. क्योंकि ये तो तय है की एनडीए की तरफ से नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे.

यही वजह है की अब बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनका  पीएम बनने का सपना फिलहाल लगभग दफन हो गया है. अब नीतीश कुमार केवल बिहार तक ही सीमित रहेंगे.

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