येदियुरप्पा को न्योता कांग्रेस-जेडीएस के लिए ‘बड़ा अवसर’

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सवाल है कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाता है तो कांग्रेस-जेडीएस को क्या करना चाहिए? राजभवन पर धरना देना काफी नहीं होगा। इसे एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में बदलकर दिखाना होगा। एक ऐसा अवसर जिसमें बीजेपी नाक रगड़ ले लेकिन उसे जरूरी 8 विधायक नहीं मिल सके। यह लोकतंत्र बचाने की जंग होगी, उसके लिए समर्पण दिखलाने की जंग होगी। कांग्रेस-जेडीएस को दिखाना होगा कि वे बिकने वाले तत्व नहीं हैं। यह दिखाना आसान नहीं है लेकिन असम्भव भी नहीं। कुछ समय पहले झारखण्ड में राज्यसभा चुनाव के दौरान यूपीए यह करिश्मा दिखा चुकी है।

कर्नाटक में चुनाव नतीजों के बाद भी जारी है लोकतंत्र की लड़ाई। तस्वीर इंडिया.कॉम।

ज्यादा पुरानी बात नहीं है। इसी साल मार्च महीने में झारखण्ड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हुए। बीजेपी की ताकत एक सीट जीतने की थी। आदत के अनुरूप बीजेपी ने खरीद-फरोख्त से दूसरा उम्मीदवार जिता लेने का दांव भी चल दिया। 4 वोट का जुगाड़ करना था। यूपीए खेमे के पास 3 अतिरिक्त वोट भी थे लेकिन बीजेपी प्रत्याशी चुनाव हार गया। यूपीए के विधायक बिकने को तैयार नहीं हुए।

बीजेपी ने पूरा जोर लगाया। हवा फैलायी मानो दोनों सीट वह जीत लेगी। एक क्रॉस वोटिंग जरूर हुई लेकिन पूरा का पूरा यूपीए कुनबा एकजुट रहा। धनबल हार गया। गठबंधन का बल जीत गया। यूपीए के राज्यसभा उम्मीदवार धीरज साहू जीत गये, जबकि बीजेपी उम्मीदवार सोंथालिया की हार हुई।

अगर येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता है तो कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस झारखण्ड में राज्यसभा चुनाव का दो महीने पहले का ये अनुभव दोहरा सकती है। एकजटुता दिखला सकती है।

कांग्रेस-जेडीएस इस लड़ाई को अलग तरीके से परिभाषित कर सकती है-

  • कांग्रेस और जेडीएस इस मौके को विधानसभा चुनाव के बाद की दूसरी लड़ाई घोषित कर दे।
  • 100 करोड़ के ऑफर को ठुकराने की लड़ाई।
  • धनबल को परास्त करने की लड़ाई।
  • इनकम टैक्स ऑफिस और सीबीआई के दुरुपयोग से लड़ने का जज्बा दिखाने की लड़ाई।

यह कोई आसान काम नहीं है लेकिन झारखण्ड में यूपीए ने यह मुश्किल काम कर दिखाया है। कर्नाटक के नेता इससे सीख ले सकते हैं।

117 विधायकों को एकजुट रखने के लिए बहुमत साबित करने के दिन अंतिम समय तक तगड़ी हिम्मत दिखलानी होगी।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और राहुल गांधी एक साथ आए हैं तो 2019 में भी ये गुल खिलाएंगे। तस्वीर सबगुरु.कॉम।

अगर ये काम कांग्रेस-जेडीएस ने कर दिखाया तो इसके नतीजे बहुत सुखद होंगे-

  • कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पर अनैतिकता की मुहर हट जाएगी।
  • अतीत में बीजेपी के साथ गठबंधन में रहने का धब्बा कुमार स्वामी के मुताबिक धुल जाएगा।
  • देवगौड़ा का सेकुलर अतीत पवित्र हो जाएगा
  • कांग्रेस ने सरकार गंवाकर जो प्रतिष्ठा गंवाई है उसकी भरपाई हो जाएगी
  • गठबंधन की अहमियत का सबक सीखने-सिखाने को मिलेगा

अगर कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ-साथ जेडीएस विधायकों व अन्य सहयोगियों को बिकने से रोक दिया, तो समझिए कर्नाटक की लड़ाई ही वो नहीं जीतेंगे, 2019 की लड़ाई भी जीतने के करीब पहुंच जाएंगे। पूरे देश की सियासत बदल जाएगी।

अगर राज्यपाल ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने को बुलाया तो इसे एक मौका बनाए कांग्रेस और जेडीएस। बीजेपी के मनोबल को तोड़ने का मौका, धनबल को परास्त करने का मौका और् अपने नैतिक बल को ऊपर उठाने का मौका। सवाल ये है कि झारखण्ड में एक विधायक वाला एमसीसी नहीं टूट सकता, निर्दलीय बिक नहीं सकते तो क्या कर्नाटक के विधायक बिकाऊ हैं कि वे ऐसा नहीं दिखा सकते?

By KumarPremJee

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