यही इस किसान आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता है, पूरे देश को सीकर के इस किसान आंदोलन से सीखने की जरूरत

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All India Kisan Sabha

सीकर।

सीकर कृषि मंडी में किसानों द्वारा कर्जमाफी समेत कई मांगों को लेकर किसान महापड़ाव को आज 12 दिन पुरे हो गए हैं। पिछले दो रोज से किए जा रहे चक्का जाम के दौरान अब तक शांति बनी हुई है। 1सितंबर से शुरू हुए किसान महापड़ाव ने अब तक शांति और अनुशासन की जो मिशाल पेश की हैं वो वाकई काबिले तारीफ है। हजारों किसान सीकर कृषि मंडी में 12 दिन से पड़ाव डाले हुए हैं, उनमें सरकार के प्रति आक्रोश भी है लेकिन शांति व अनुशासन की बात की जाए तो अब तक के आंदोलन को सौ में से पूरे सौ नंबर
आंदोलन के चरण….
1 सितंबर को मंडी से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक रैली हुई,
2 सितंबर की रात को पुलिस लाइन तक रैली निकाली ओर
4 सितंबर को तो मंडी से लेकर जाट बाजार तक ऐसे रैली हुई की प्रिंट मीडिया के अनुसार वो सीकर में अब तक कि सबसे बड़ी रैली थी लेकिन सब कुछ शांति प्रिय रहा।
11 सितंबर को पूरे जिले में करीब लगभग तीन सौ से ज्यादा स्थानों पर किसानों ने चौकियां बनाकर पूरे प्रशासन और यातायात को शांतिपूर्वक जाम लगाकर ठप्प कर दिया गया है। कृषि मंडी से कलेक्ट्रेट के घेराव के लिए निकले किसानों को पुलिस ने मंडी गेट करीब 100 मीटर की दूरी पर ही बेरिकेट्स लगाकर रोका और आगे नहीं जाने दिया। पुलिस की संख्या का अनुपात मौजूद किसानों की संख्या में बहुत कम था लेकिन बावजूद इसके किसानों की अगुवाई कर रहे अमराराम ने बड़ी समझदारी दिखाते हुए पुलिस से भिड़ने के बजाय सड़क पर ही किसान सत्याग्रह शुरू कर दिया। सड़क पर ही किसानों ने तंबू लगा लिए, ट्रैक्टर की ट्रॉली को मंच बना लिया।

आज 12 वें दिन किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल सरकार से वार्ता करने के लिए गया हुआ है और मंडी से बाहर मुख्य सड़क पर किसान अपनी सभा कर रहे हैं।;
प्रशासन ने कलक्ट्रेट व आस-पास के इलाके में धारा-144 आनन फानन में लागू कर दी। वहीं कलक्ट्रेट की तरफ आने वाले सभी रास्तों को भी बंद कर दिए। आम लोगों का आवागमन भी बंद रहा। बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा। दुकानें तो खुली, मगर ग्राहक नहीं आए। उधर, बस डिपो में ही खड़ी रही रोड़वेज बसें, सोमवार सुबह से रोडवेज बसें नहीं चली। सभी बसें सीकर आगार के डिपो में ही खड़ी रही। उधर, झुंझुनूं, चूरू व बीकानेर की बसें भी सीकर होते हुए जयपुर नहीं जा सकी। ऐसे में यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि शहर में ऑटो तो चले।
ये फोटो आज महापड़ाव के 12 वे दिन करीब साढ़े चार बजे क्लिक की गई है। ये एक फोटो सारी कहानी बयां करती है। किसान 12 दिन से पड़ाव डाल कर बैठे हो, गांव से लेकर शहर तक चक्का जाम लगा रखा हो ओर बावजूद इसके सब कुछ शांति व अनुशासन से चल रहा हो, धारा-144 में बैठकर किसान ताश-पत्ती खेल रहे हो और उनके पास पुलिस निश्चिन्त होकर बैठी हो, वाकई कमाल है।

देश में आजतक कई आंदोलन हुए लेकिन ताकत होने के बावजूद इतने लंबे समय तक शांतिप्रिय से आंदोलन आपको देखने को नही मिलता। किसानों के अगुवा नेता अमराराम भी धन्यवाद के पात्र हैं कि उन्होंने बड़े ही अच्छे से किसानों के हित के लिये इस किसान आंदोलन को आगे बढ़ाया। पूरे देश को सीकर के किसान आंदोलन से ओर आंदोलन करने वाले नेताओं को अमराराम से सीखने की जरूरत है।