दिल्ली बीजेपी को है ट्विटर, फेसबुक पर ”दैनिक जागरण” का सहारा

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नई दिल्ली : बीजेपी दिल्ली प्रदेश के ट्विटर हैंडल पर सबसे ज्यादा दैनिक जागरण नामक अख़बार में छापी गयी आम आदमी पार्टी , केजरीवाल और दिल्ली सरकार के विरुद्ध खबरे शेयर की जाती है | इसके बाद अमर उजाला और फिर नवोदय टाइम्स नामक सस्ते अख़बार की खबरे |

ताज्जुब की बात है 361k फोल्लोवेर्स वाले बीजेपी दिल्ली के अकाउंट को retweet भी बहुत कम मिलते है और उपरोक्त के आलावा शायद ही ये किसी अख़बार से खबरे शेयर करते हैं |

गौर करने वाली बात यह भी है की दैनिक जागरण अख़बार द्वारा  बीजेपी के विरोध में शायद ही कोई खबर छापी जाती है, गत वर्ष दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने दैनिक जागरण पर मानहानि का भी केस किया था | कई मौको पर साफ़ देखने को मिलता है की दैनिक जागरण द्वारा छापी गयी खबर वास्तविकता से काफी दूर होती है |

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एक ही स्थान पर दौरे को लेकर दिल्ली के अखबारों की दो खबर देखिये – पहली है नवभारत टाइम्स की और दूसरी दैनिक जागरण की |

ऐसी ही एक और खबर देखिये जिसको कैसे दैनिक जागरण ने मरोड़ कर प्रस्तुत किया है |

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देखिये कैसे दैनिक जागरण और इसके पत्रकार करते है बीजेपी की ट्रोल आर्मी जैसे काम, पिछले माह दिल्ली के मंत्री जब हड़ताल पर थे उस दौरान एक ट्वीटर यूजर नें मनीष सिसोदिया को tweet करते हुए कुछ तंज़ कसा तो उसके जवाब में दैनिक जागरण के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बेहूदा जवाब दिया गया हालाँकि बाद में इसको डिलीट कर लिया गया लेकिन तबतक सोशल मीडिया में स्क्रीनशॉट वायरल हो चूका था |

पुराना पापी है दैनिक जागरण 

दैनिक जागरण पर जम्मू के कठुआ gangrape केस की झूठी खबर प्रकाशित करने का भी आरोप है, उसके बाद व्यापक स्तर पर दैनिक जागरण का विरोध किया था, गत वर्ष उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भी दैनिक जागरण पर बीजेपी का साथ देने के आरोप लगे थे |

‘दैनिक जागरण’ देश का सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाला अखबार। जनवरी 2018 में मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल यानी एमआरयूसी ने वर्ष 2017 का रीडरशिप सर्वे जारी करते हुए बताया था कि भारत के सभी भाषाओं के अखबारों की कुल पाठक संख्या के आधार पर जो टाप ट्वेंटी की लिस्ट बनी है, उसमें दैनिक जागरण नंबर एक पर है।

इस सर्वे की रिपोर्ट को माने तो दैनिक जागरण को पढ़ने वालों की संख्या 7,03,77,000 (7 करोड़ से ज्यादा) है। ये संख्या बहुत भारी है, जाहिर हैं दैनिक जागरण पर जिम्मेदारी भी बहुत ज्यादा होगी!

20 अप्रैल, 2018 गुरुवार को दैनिक जागरण के फ्रंट पेज खबर की हेडिंग है ”कठुआ की बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म, सवालों के घेरे में चार्जशीट”

इस खबर को पत्रकारिता के इतिहास में सबसे शर्मनाक खबरों की लिस्ट में सबसे टॉप पर दर्ज किया जाना चाहिए। क्योंकि ये खबर 100% फर्जी है। दैनिक जागरण ने अपने 7 करोड़ पाठकों तक झूठी खबर पहुंचाई। ये खबर अखबार के फ्रंट पेट पर अवधेश चौहान के नाम से बाइलाईन छपी है।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने मासूम के साथ हुए दुष्कर्म को नकारकर आईटी सेल का काम किया है। साथ ही इस शर्मनाक और फर्जी खबर छापकर आसिफा को एक बार फिर मार दिया।

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वैसे पत्रकारिता का कोई स्वर्णिम दौर तो नहीं था लेकिन ये सबसे शर्मनाक दौर जरूर है। लोकतंत्र का चौथा खंभा सड़ चुका है। संपादक अपना इमान अपने राजनीति आकाओं के हाथों बेच चुके हैं। टीवी, अखबार हर रोज अपने पाठकों दर्शकों से झूठ बोल रहा है।

कोबरा पोस्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही अपने स्टींग ऑपरेशन में खुलासा किया था कि कैसे अखबार और न्यूज चैनल पैसा लेकर राजनीतिक पार्टियों के पक्ष में माहौल बनाने को तैयार हैं। किस तरह मीडिया राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए जा रहे धर्म के धंधें में उनका सहयोग कर रही है। ये फरेब कितना साल चलेगा? एक दिन जनता होश में आएगी और पत्रकारिता के अस्तित्व को ही नकार देगी।

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