राजस्‍थान उपचुनाव: नतीजों के पोस्‍टमॉर्टम से बीजेपी के लिए खतरे की घंटी, कहीं मिले 2, 1 तो कहीं 0 वोट…

विधानसभा चुनाव-2014 में बीजेपी ने अलवर सीट 2.5 लाख वोटों से जीती थी, लेकिन इस बार पार्टी को लगभग 2 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा, यानी की पार्टी को लगभग साढ़े चार लाख वोटों का नुकसान हुआ.

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जयपुरराजस्थान उपचुनाव के नतीजों के नतीजे बीजेपी के लिए किसी बुरे सपने की तरह हैं। पार्टी इससे उबरने की कोशिश कर रही है, लेकिन अलवर, अजमेर और मांडलगढ़ सीट पर हार से जुड़ी हर एक नयी रिपोर्ट पार्टी के लिए नयी चुनौतियां सामने लाती है। इन उपचुनाव के नतीजों के पोस्टमार्टम से पता चला है कि कई ऐसे बूथ थे जहां पर बीजेपी उम्मीदवार को मात्र 01 या 02 वोट मिले। यहीं नहीं कुछ बूथ तो ऐसे भी थे की जहां पर बीजेपी को एक भी वोट नहीं मिला है। जिस पार्टी की सरकार प्रचंड बहुमत से देश में दिल्ली से और राजस्थान में राज कर रही है, उसी के पार्टी के कैंडिडेट के कुल जमा खाते में 1, 2 या 0 वोट एक बेहद गंभीर खतरे का संकेत हैं। यहां दीगर यह है कि राजस्थान में इसी साल विधानसभा के चुनाव हैं और अगले साल हिन्दुस्तान नया प्रधानमंत्री चुनने जा रहा है। उपचुनाव के विश्लेषण से बीजेपी की सिट्टी-पिट्टी गुम है।

बीजेपी को कहीं मिले 2, 1 तो कहीं 0 वोट…

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अजमेर के नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 223 में बीजेपी को मात्र एक वोट मिला, जबकि यहां कांग्रेस को 582 वोट मिले। बूथ नंबर 224 में बीजेपी को 2 वोट मिले जबकि कांग्रेस यहां 500 वोट हासिल करने में कामयाब रही। दूदू विधानसभा के बूथ नंबर 49 में हुई वोटिंग भी बीजेपी के लिए निराशाजनक थी। यहां किसी भी मतदाता ने बीजेपी को वोट नहीं दिया जबकि कांग्रेस को 337 वोट मिले। इसका मतलब ये भी था कि बीजेपी के चुनाव एजेंट भी जो इस बूथ से वोट देने के लिए रजिस्टर्ड थे, उन्होंने भी पार्टी को वोट नहीं दिया।

दिल्ली में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमने अजमेर में दोनों शहर की सीटों को खो दिया है। विरोधात्मक स्थिति में भी 1985 और 1998 को छोड़कर पहले हम इस सीट को जीतने में कामयाब रहे थे। शहरी वोटों में गिरावट वाकई चिंता की बात है।’

पार्टी के संगठनात्मक मामलों से जुड़े पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा, ‘राजनीति में नेतृत्व का एक ब्रांड वैल्यू है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। 10 महीने बाद होने वाले चुनावों में हम राजे के नेतृत्व में चुनाव में जा सकते हैं।’

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