केबिनेट विस्तार 2017: फिर नजर आई मोदी-शाह की जुगलबंदी

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नई दिल्ली।  राष्ट्रपति भवन में रविवार को जब केंद्रीय मंत्रिमंडल के नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, इस समय सामने की कतार में बैठे पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी मोजूद रहे, और साथ-साथ ताली बजा रहे थे। बीजेपी के शिखर तक पहुंचने में इन दोनों की जुगलबंदी का बहुत बड़ा योगदान है और यह एक बार फिर नजर आया। यह पीएम नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल का तीसरा और संभवत: इस कार्यकाल का आखिरी विस्तार था। मंत्रियों से छीनी गई जिम्मेदारियों, उनके प्रमोशन, नए चेहरों को मौका और बीते कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और आगामी दिनों में चुनावी राज्यों में अभी से सुगबुगाहट आरम्भ करने के जरिए एक बार फिर पार्टी और सरकार में अमित शाह की रसूख पर मुहर लगी।

वर्तमान में बीजेपी में नरेन्द्र मोदी को छोड़कर अन्य सभी की भूमिकाएं बेहद लिमिट हो चुकी है। नरेन्द्र मोदी ही पार्टी के लिए वोट खींचने वाली शख्सियत चेहरा हैं। वह सरकार के चेहरे हैं। ऐसे में अमित शाह ने कूटनीतिक रणनीति बनाते हुए BJP संगठन में अपनी अलग तरीके की महत्वपूर्ण और बड़ी भूमिका तय की है। शाह को सरकार के राजनीतिक और शासकीय लक्ष्यों के बारे में अच्छे से पता है। शाह, नरेंद्र मोदी के साथ गजब का संतुलन बनाते हुए अपना काम करते हैं।

आज से पहले जब भी भाजपा सत्ता में रही, तब पार्टी संगठन अध्यक्ष या तो निष्प्रभावी नजर आए या वे सरकार की इमेज में दबते दिखे। वेटरन लीडर कुशाभाऊ ठाकरे को पार्टी में काफी सम्मान की नजर से देखा जाता था, लेकिन वह सरकार की नीति निर्धारक या फैसले लेने वाली अंदरुनी टीम के कभी हिस्सा नहीं रहे। बंगारू लक्ष्मण जैसे अध्यक्ष तो खुद समस्या में घिर गए, वहीं पूर्व पीएम अटल बिहारी और उनके डेप्युटी एलके आडवाणी की पार्टी अध्यक्ष जन कृष्णमूर्ति से टकराव हो चुका है।

बीजेपी के पूर्वाध्यक्षों से एकदम उलट अमित शाह ने सरकार की छवि में दबे पार्टी चीफ की इमेज से बाहर निकले। चुनावों के लिए योजना तैयार करने के जरिए वह एक सफलतम और कामयाब रणनीतिकार के तौर पर उभर कर निकले। शाह ने पार्टी के लिए प्रचार भी किया है, लेकिन यह उनकी असली ताकत नहीं है। उनकी असली ताकत पार्टी के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर चलना और जरूरत पड़ने पर सीनियरों को पद खाली करने के लिए राजी करना है। बीच का रास्ता निकालने में शाह ने बड़ी महारत हासिल की है।

सरकार के कामकाज का फीडबैक….

सरकार के कामकाज का फीडबैक देने की दिशा में अमित शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ यह आकलन करने में भी मदद करते हैं कि विभिन्न मंत्री और संबंधित मंत्रालय कैसा काम कर रहे हैं। असम, उत्तराखंड और यूपी में होने वाले चुनावों से पहले अमित शाह यह तय करते नजर आए कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को किस तरह बीजेपी में शामिल करना है। इसके अलावा, वह राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ी बारिकी से नजर रखते हैं।

मंत्रिमंडल का विस्तार साफ तौर पर पीएम का विशेषाधिकार है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘पीएम नरेन्द्र मोदी ने बेहद उच्चे मानदंड स्थापित किए हैं। यह साफ है कि वह सभी मंत्रालयों और हर शख्स के कामकाज की बेहद नजदीक से निगरानी कर रहे हैं। इसके बाद ही पीएम ने तय किया कि किसको क्या जिम्मेदारी देनी है।’ जेटली ने मंत्रिमंडल में शामिल किए गए बीजेपी नेताओं की जमकर तारीफ की। जेटली ने कहा कि पीएम ने इन नेताओं की क्षमताओं को पहचाना और पूर्व नौकरशाह हरदीप पुरी, आरके सिंह, सत्यपाल सिंह और अल्फोंस कन्नाथनम को पार्टी से जोड़ा गया।

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