कृषि उर्वरकों की कीमत में बढ़ोतरी, सरकार द्वारा कृषकों को दी गयी एक और चोट |

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किसानों के सम्पूर्ण दमन को उतारू सरकार |

लंबे अर्से से चला आ रहा कृषि व्यवसाय आज भी भारत में सबसे अधिक होने वाला जरूरी व्यवसाय है, जिसके माध्यम से आम जनता का भरण पोषण होता है। अपितु भारतीय सरकार इस जरूरी व्यवसाय में भी अडचन पैदा करना चाह रही है और साथ – साथ में कृषकों के जीवन में भी, जिनका सम्पूर्ण जीवन और परिवार इसी व्यवसाय पर निर्भर है।

सरकारी समिति ईफको कृषि उर्वरकों (डीएपी, एनपीके) के दाम बढ़ोत्तरी कर दी है, सरकारी समिति ने यह कीमत लगभग 45–58 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। सोचने वाली यह बात है, एक किसान इन बढ़े कीमत के उर्वरक का उपयोग करके फसल तैयार करेगा जिसकी कीमत बाजार में 15 – 25 रुपये प्रति कुंटल (100 किलोग्राम) लगाई जाएगी, इस तरह किसान बचायेगा क्या, खायेगा क्या और बेचेगा क्या ?  इस प्रकार न तो ये व्यवसाय रह जाएगा, न व्यवसाय करने वाले। सरकारी समिति ईफको इस निर्णय पर एक बार विचार अवश्य करना चाहिए, क्यूंकी यह निर्णय, कई लोगों की जीविका, उनके परिवार की अर्थव्यवस्था और जीवन को हिला कर रख देगा।

उर्वरकों की कीमत में बढ़ोतरी खबर वायरल हो चुकी है जिसके अनुसार सरकारी समिति ईफको द्वारा डीएपी की कीमत 700 प्रति 50 किलोग्राम कर दी जाएगी। किसानो संगठनों के बढ़ी हुई कीमतों के खिलाफ विरोध किया है तथा केंद्र सरकार से बढ़ी हुई कीमतों को कम करने की मांग की है। हालाकी ईफको के प्रबंध निदेशक का कहना है की ईफको के पास मौजूद 11.26 लाख टन कॉम्प्लेक्स फर्टीलाइजर (खाद) किसानों को पुरानी कीमत में ही बेचे जाएँगे।

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