यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व CM अखिलेश यादव द्वारा लिए गए, बिजली के महंगे सौदों को रद्द किया

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उत्तर प्रदेश सरकार का कड़ा फैसला…

► यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकार द्वारा लिये फैसले को किया रद्द

► जेपी, जिंदल, अडाणी आदि के साथ हुए 15 बिजली खरीद समझौते रद्द किए गए

 उत्तर प्रदेश की पिछली अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने 3,800 मेगावॉट बिजली खरीदने के लिए समझौते किए थे

► मार्च 2017 में यूपी राज्य में बिजली की कुल डीमांड 8000 एमयू

बिजली के महंगे सौदे रद्द….

आदित्यनाथ योगी के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 3,800 मेगावॉट के दीर्घावधि बिजली खरीद समझौते (पीपीए) को रद्द कर दिए हैं। इनकी खरीद लागत मौजूदा हाजिर बाजार की तुलना में ज्यादा थी। यह समझौते 15 साल की बिजली खरीद के लिए हुए थे, जिसकी आपूर्ति जिंदल पावर, जेपी निगेरी, लैंको, अडाणी पावर, जीएमआर और जेएसडब्ल्यू को करनी थी। उत्तर प्रदेश की पिछली समाजवादी पार्टी सरकार ने 3,800 मेगावॉट बिजली खरीदने के लिए समझौते किए थे।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने औसत रेट से महंगी बिजली खरीदी….

राज्य में मांग के मुताबिक कुल 6,652 मेगावॉट बिजली के लिए बोली 3.9 रुपये से लेकर 5.5 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिली थी। अखिलेश नेतृत्व वाली सरकार ने कुल 3,882 मेगावॉट बिजली खरीदने के लिए समझौता किया था, जिसकी खरीद दर 4.06 रुपये प्रति यूनिट थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने पिछले सप्ताह बहुत ज्यादा घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के बारे में खबर दी थी, जिसमें बताया गया था कि ज्यादा बिजली खरीद लागत की वजह से उत्तर प्रदेश की वितरण इकाई का घाटा बढ़ा है।

भारत देश में बिजली खरीद की औसत लागत 3 रुपये प्रति यूनिट के नीचे चली गई है (कम अवधि के बाजार सहित) लेकिन उत्तर प्रदेश में ज्यादा दरों पर बिजली खरीद जारी है। पूर्व यूपी सरकार ने पिछले साल करीब 400 करोड़ यूनिट बिजली 4.2 से 4.9 रुपये प्रति यूनिट के महंगी दरों पर खरीदी थी। यह राज्य की मासिक बिजली मांग का आधा है। ऐंजल ब्रोकिंग ने अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा है, ‘दीर्घावधि बिजली खरीद समझौतों से बिजली स्टेशनों से दीर्घावधि के लिए बिजली खरीद सुनिश्चित होती है, जिसकी वित्तीय व्यवहार्यता भी होती है। इन बोलियों के निरस्त होने से, हमारी राय में बिजली क्षेत्र को झटका लगेगा, जो कई मोर्चों पर समस्याओं से जूझ रही हैं।’

अप्रैल से दिसंबर के बीच उत्तर प्रदेश ने 3962 एमयू बिजली की खरीद पर 1,690 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह बिजली विभिन्न बिजली इकाइयों से 4.5 रुपये प्रति यूनिट की औसत लागत से खरीदी गई। इस खरीद की पूरी लागत उपभोक्ताओं को वहन करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश के बिजली मंत्री शशिकांत शर्मा ने इस मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था, ‘हम डीईईपी (केंद्रीय बिजली मंत्रालय की ई बोली और ई-रिवर्स बोली पोर्टल के माध्यम से कम अवधि के लिए बिजली खरीद के लिए होने वाली बोली) की बोली में हिस्सा लेंगे। इसका फायदा उपभोक्ताओं को दिया जाएगा।’

अपनी कुल 9,281 मेगावॉट बिजली खरीद में उत्तर प्रदेश 4,224 मेगावॉट बिजली इंटर स्टेट उत्पादन केंद्रों से, 228 मेगावॉट दीर्घावधि समझौतों से, 364 मेगावॉट मध्यावधि समझौतों से, 150 मेगावॉट द्विपक्षीय कारोबार से, 26 मेगावॉट हिस्सेदारी समझौतों से लेता है। राज्य इस समय बिजली एक्सचेंजों से बिजली नहीं लेता। उत्तर प्रदेश में मार्च 2017 में सर्वाधिक मांग 8,000 एमयू रही। आने वाले गर्मी के महीनों में मांग बढ़कर 10,000 एमयू तक पहुंच सकती है।

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