राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी अंकतालिका से बनी मावंडा सरपंच को पद से हटाया

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सीकर

राजस्थान हाईकोर्ट ने फर्जी अंक तालिका के आधार पर निर्वाचित सीकर के नीमकाथाना की ग्राम पंचायत मावण्डा की सरंपच को तत्काल पद से हटने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश आलोक शर्मा ने कहा कि सरिता देवी सैनी ने सरपंच बनने के लिए नामांकन के समय फर्जी अंकतालिका पेश की थी। ऐसे में वह सरपंच पद रहने की हकदार नहीं है। उसे इस पद से तत्काल हटाना चाहिए। न्यायाधीश आलोक शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सहीराम की ओर से दायर परमादेश (को-वारंटो) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

मावंडा के सहीराम को मिली न्याय…..

कोर्ट ने याचिकाकर्ता मावंडा आरएस के सहीराम सैनी की याचिका पर ये आदेश दिए। सहिराम द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जनवरी 2015 में हुए सरपंच चुनाव में ओबीसी वर्ग की सरिता देवी मावण्डा ग्राम पंचायत की सरपंच बनी थी। चुनाव लडऩे के लिए आठवीं कक्षा की फर्जी अंकतालिका बनाई और वह पढ़ी लिखी नहीं थी। फर्जी अंकतालिका मामला सही पाए जाने पर अब सरिता देवी सैनी की मुश्किलें ओर बढ़ सकती है। आपराधिक मुकदमे में कानून का फंदा कस सकता है और सजा हो सकती है।

– भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे, उपसरपंच पर हमले भी हुआ

मावंडा आरएस की सरपंच बनने के बाद सरिता देवी सैनी पर फर्जी अंकतालिका का मामला तो सामने आया, साथ ही सरपंच कार्यकाल में सरिता देवी, उनके पति व अन्य परिजनों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। इस पंचायत में पचास लाख के विकास कार्य में धांधली के आरोप भी लग चुके हैं। जिनकी शिकायतें भी ग्राम पंचायत शासन व पंचायत राज विभाग को हो रखी है। यहीं नहीं सरपंच सरिता ने उपसरपंच श्रीराम सैनी पर जानलेवा हमला भी करवाया था। इस मामले में नीमकाथाना सदर द्वारा सरपंच के भतीजे राजेश व सुंदरलाल के खिलाफ चालान पेश हो चुके हैं।

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