शेखावाटी विश्वविद्यालय पर बढ़ता राजनीतिक दबाव और उच्च शिक्षा का दरकता वर्चस्व

947

सीकर- शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलपति पर अनावश्यक दबाव बनाकर हर बार बिना निरीक्षण के संबद्धता लेने वाले निजी महाविद्यालयों के संचालक एक बार पुनः एक जुट होकर कुलपति प्रो बी एल शर्मा पर दबाव बनाने लगे हैं। राजस्थान प्रदेश निजी कालेज संघ की मांग है कि पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी उन्हें संबद्धता अभिवृद्धि दी जाएं। महाविद्यालय संबद्धता के लिए आवेदन के बाद अगर कोई महाविद्यालय किसी विषय को संचालित नहीं करें तो उनका धन लौटाया जायें।

निजी महाविद्यालयों में अयोग्य शिक्षकों का जमावड़ा…

शेखावाटी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त निजी महाविद्यालयों में पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं का नितांत अभाव है। अयोग्य शिक्षकों का जमावड़ा है। सीकर के संवाददाता पीयूष शर्मा की रिपोर्ट ने शेखावाटी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त इन निजी महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की योग्यता, नियुक्ति तिथि और वेतनमान के बारे में जानना चाहा तो विश्वविद्यालय मौन हो गया। विश्वविद्यालय को पता है कि ये निजी महाविद्यालय अव्यवस्थाओं का दस्तावेज़ है। हर बार राजनीतिक दबाव के चलते कुलपति इन महाविद्यालयों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते यह यक्ष प्रश्न है?
सीकर टीम ने मामले की काफ़ी पड़ताल की। पड़ताल में पता चला कि अधिकांश महाविद्यालयों में योग्यताधारी शिक्षक, पुस्तकालय और प्रयोगशाला नहीं है। पुस्तकालय के नाम पर पासबुक्स और कुंजियों को देखा गया। यही कारण है कि उन्हें यह भय है कि कहीं निरीक्षण दल उनकी मान्यता ख़त्म नहीं कर दें।
किसान, मज़दूर, कामगार और खोंमचा लगानने वाला अपनी संतान को उच्च अध्ययन करवाने हेतु ख़ून पसीना एक कर देता है। अयोग्य शिक्षकों के चलते इन महाविद्यालयों से निकले विद्यार्थी दर-दर की ठोकरें खाते रहते है। धन का दुरुपयोग हो रहा है।
शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलपति ने नियुक्ति के बाद एक दिन भी किसी महाविद्यालय का औचक निरीक्षण नहीं किया। कार्यालय में बैठ कर अपने सेवानिवृत्ति तिथि का इंतजार कर रहे हैं। बीएड महाविद्यालयों में विद्यार्थियों का परेशान किया जा रहा है। उनसे महाविद्यालयों में नहीं आने पर 15-25 हज़ार रुपए लिए जा रहे हैं। रोज अनुपस्थिति पर आर्थिक दण्ड दिया जाता है। धन संग्रह का नायाब तरीक़ा है।

शिक्षक के सुनाये किस्से ने दिखाया आइना…

दांतारामगढ़ के एक शिक्षक ने हमें एक मजेदार किस्सा सुनाया -‘ मैं दांतारामगढ़ से बीएड कर रहा था, जब भी मेरी कालेज में चेजा(निर्माण कार्य) शुरु होता दूसरे दिन किस न किसी बहाने हमें आर्थिक दण्ड देना होता। जिस दिन काम शुरु होता उस दिन हमारे दिलों की धड़कन तेजी से बढ़ जाती।
धन जमा नहीं कराने पर महाविद्यालय की प्रबंध समिति के पदाधिकारी परीक्षा में नहीं बैठने देने की धमकी देते।”
पीड़ित विद्यार्थियों की ख़बर भी समाचार पत्र नहीं छापते हैं। लिखा होता है ‘एक निजी बीएड महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया।’ क्यों नहीं इन महाविद्यालयों की पहचान उजागर करते?
आज से निजी महाविद्यालयों के संचालक पंडित दीनदयाल शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के सम्मुख धरना देंगे। अब देखना होगा कि कुलपति क्या निजी महाविद्यालयों के संचालको के समक्ष झुकेंगे। राजस्थान विश्वविद्यालय में कुलपति रहते हुए आपने श्लाघनीय निर्णय लिए थे। परीक्षा में होने वाले नकल पर लगाम लगाने के लिए कठोर निर्णय लिए थे।
आप कभी निजी महाविद्यालयों के समक्ष झुके नहीं। अब देखना होगा कि शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए क्या कठोर निर्णय लेंगे या राजनीतिक दबाव के चलते समझौता कर लेंगे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here