क्या बीजेपी ने न्याय पालिका व अन्य स्वायत्त संस्थाओं को अपने प्रभाव में जकड लिया है ?

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क्या बीजेपी ने न्याय पालिका को अपने प्रभाव में जकड लिया है ?

वरिष्ठ वकील व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने सही बात को खुलकर उठाने के लिए चारों शीर्ष न्यायाधीश न्यायाधीशों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सत्ता का घोर दुरुपयोग है | देश को इससे बचाने की जरूरत है | यहां प्रश्न यह उठता है कि क्या एक फर्जी एनकाउंटर के मामले में आरोपी अमित शाह का जांच होते हुए देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रहना क्या न्याय संगत है ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें भारतीय जनता पार्टी पर लगातार स्वायत्त संस्थाओं के कामकाज में दखल देने का के आरोप लगते रहे हैं , व अब यह एक नया चलन सा मालूम प्रतीत होता है

चाहे वह पहले केंद्रीय विद्यालय संगठन , जेएनयू व BHU जैसे शैक्षणिक संस्थान हों , या उसके बाद इसरो जैसे देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित एजेंसियां हो , या फिल्म इंस्टिट्यूट में जबरन अपनी पार्टी के नेताओं को घुसाने का मामला हो | लेकिन देश की न्यायपालिका में अपने प्रभाव से दखलंदाजी करना जनतंत्र के लिए खतरे की घंटी है |

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