पॉलिटिकल साइंस में बनाएं करियर, यहां मिल सकती है अच्छी नौकरी

करियर विकल्पों में राजनीति विज्ञान का महत्व सदाबहार है, इसमें अध्यापन-कार्य से लेकर शोध, चुनाव व कानून से जुड़े कार्यक्षेत्रों में काम कर सकते है , इसके जानकार युवाओं की पॉलिटिकल व इंटेलिजेंस एनालिस्ट या कंसल्टेंट्स के तौर पर सेवाएं ली जा रही है

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पारंपरिक करियर विकल्पों में राजनीति विज्ञान यानी पॉलिटिकल साइंस का महत्व सदाबहार कहा जा सकता है। यह विषय समाजशास्त्र का एक हिस्सा है और इसके अंतर्गत प्रशासन की विभिन्न प्रणालियों और दुनिया भर में मौजूद राजनैतिक तंत्रों व उनकी नीतियों को पढ़ाया जाता है। इसमें अध्यापन-कार्य से लेकर शोध, चुनाव व कानून से जुड़े कार्यक्षेत्रों में काम किया जा सकता है। इस समय राजनीति विज्ञान के जानकार युवाओं की पॉलिटिकल व इंटेलिजेंस एनालिस्ट या कंसल्टेंट्स के तौर पर सेवाएं ली जा रही है।

देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर इस विषय पर आधारित कोर्सेज उपलब्ध है। इसलिए यह कहना कुछ हद तक सही है कि अन्य कोर्सेज की तुलना में इसमें दाखिला पाने के लिए ज्यादा मारामारी की स्थिति नहीं है। हालांकि, बेहतर मुकाम पाने के लिए इस विषय में उच्च अध्ययन की ओर रुख करना काफी महत्व रखता है। दूसरे पारंपरिक कोर्सेज की तुलना में करियर को संवारने के कहीं ज्यादा अवसर इस विषय की पढ़ाई के जरिये हासिल किए जा सकते है। अकादमिक और शोध कार्यों में दिलचस्पी दिखाने वाले छात्रों को देशी-विदेशी संस्थानों की स्कॉलरशिप हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके जरिए उन्हें आगे चलकर अध्यापन के बेहतर अवसर मिलेंगे।

रोजगार के अवसर: स्कूल और कॉलेज में अध्यापन और शोध कार्यसहित अन्य क्षेत्रों में मौके होने के साथ ही हाल के वषोंर् में कुछ नए करियर विकल्प भी उभरे है।

इनमें से कुछ है-

पॉलिटिकल एनालिस्ट: राजनीति विज्ञान में पारंगत अनुभवी विशेषज्ञों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण करियर कहा जा सकता है। इनका काम मुख्य रूप से राजनैतिक निर्णयों/सरकारी नीतियों आदि पर समीक्षात्मक टिप्पणी करना और उनकी कमियों को उजागर करना है। ये बतौर विशेषज्ञ, पॉलिटिकल पार्टियों की नीतियों और चुनावी घोषणाओं पर भी अपने विचार देते है।

सोशल मीडिया मैनेजर: आम जनता के बीच जनमत तैयार करने या किसी खास राजनैतिक दल के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार करने जैसे कार्यों को बखूबी अंजाम देने में इस विषय की पृष्ठभूमि वाले लोगों को काफी उपयोगी माना जाता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया से जुड़ी नौकरी पाने में राजनीतिक शास्त्र के जानकार को ज्यादा परेशानी नहीं होती है।

पॉलिटिकल कंसल्टेंट्स: इनका काम चुनावी दंगल में प्रत्याशियों के लिए अधिकाधिक मत पाने की योजना तैयार करना और उन्हें सफलता के साथ लागू करना होता है। यह समझ जनता के साथ लंबे समय से संपर्क में रहने के बाद विकसित होती है। सामाजिक और आर्थिक स्थितियों का अच्छा जानकार होना इस संदर्भ में महत्वपूर्ण कहा जा सकता है।

इंटेलिजेंस एनालिस्ट: राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों की विचारधारा को समझते हुए उनके बारे में रिपोर्ट बनाना, इनके कार्य के दायरे में आता है। ऐसे विशेषज्ञ प्राय: अप्रत्यक्ष तौर पर काम करते है।

मार्केट सर्वे एक्सपर्ट: बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपना नया उत्पाद बाजार में उतारने से पहले ऐसे विशेषज्ञों का सहारा लेती है, ताकि उन्हें समय-समय पर प्रतिक्रियाएं मिलती रहें। इस प्रकार वे अपने उत्पाद की त्रुटियों को न सिर्फ समझ सकते है, बल्कि उनमें समय रहते सुधार कर दोबारा मार्केट में उतार सकते है।

वकील के तौर पर करियर: राजनीति शास्त्रकी पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए एलएलबी करना सही रहता है। इनके लिए मुकदमों की बारीकियों को समझना आसान होता है। वहीं जनसंचार के क्षेत्र में ऐसे सफल पत्रकारों की कमी नहीं है, जिनके पास राजनीति विज्ञान की डिग्री है। ऐसे अवसर प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में मिल सकते है।

व्यक्तित्व में क्या हो खास:

इस क्षेत्र में ऐसे युवाओं को करियर बनाने के बारे में सोचना चाहिए, जिनको देश-विदेश में चल रही राजनैतिक उथल-पुथल और सामयिक मामलों के बारे में जानने की गहरी दिलचस्पी हो। देश के बदलते राजनैतिक घटनाक्रम पर पैनी नजर और इसके सामाजिक एवं आर्थिक कारणों को समझने की दृष्टि और उनके आधार पर भावी राजनैतिक आहटों को समझने की क्षमता भी इस क्रम में एक विशिष्ट गुण कहा जा सकता है। इसके अलावा तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर नीतिगत निर्णयों को समझने की काबिलियत को भी कम महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता है। इस क्षेत्र के पेशेवरों में संवाद कौशल और भाषा पर नियंत्रण होना भी काफी मायने रखता है।

पाठ्यक्रम:

राजनीति विज्ञान कोई नया विषय नहीं है। इससे जुड़े कोर्सेज भी पुराने या परंपरागत कहे जा सकते है। दसवीं के बाद ही प्राय: एक स्वतंत्र विषय के रूप में राजनीति विज्ञान की पढ़ाई शुरू हो जाती है। ग्रेजुएशन स्तर पर बीए/बीए(ऑनर्स) कोर्स का प्रमुख तौर पर उल्लेख किया जा सकता है। आमतौर पर इन तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में मेरिट के आधार पर ही नामी विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है। इसके बाद मास्टर्स और पीएचडी तक की डिग्री हासिल की जा सकती है। दूरस्थ शिक्षा और मुक्त विद्यालयों से भी इस विषय की पढ़ाई विभिन्न विश्वविद्यालयों के माध्यम से की जा सकती है।

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