दिल्ली: पूर्ण राज्य की मांग को लेकर गोदी मीडिया ने फैलाया भ्रम

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल को लक्ष्मण रेखाओं में समेट दिया है और चुनी हुई सरकार को ही सर्वोच्च बता दिया है, तभी से बीजेपी और उसकी चहेती मीडिया ने अपना रंग दिखाना शुरुर कर दिया है |

बीजेपी और गोदी मीडिया ने मिलकर फैलाया भ्रम , कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण राज्य देने से किया इनकार, जबकि सच्चाई यह है की दिल्ली सरकार ने कोर्ट में पूर्ण राज्य और 3 अन्य संरक्षित विषयों पर कोई मांग की ही नही थी |

विधिक रिपोर्टर अनुषा सोनी खुद कोर्ट में मौजूद थी और उन्होंने किया स्पष्ट, खुद दिल्ली सरकार भी कहती आई है कि उन्होंने पूर्ण राज्य जैसी कोई मांग कोर्ट में नही की है, हालाँकि फिर भी कई हिंदी चैनल्स और बीजेपी द्वारा गलत खबर फैलाई गयी |

झूठ के कुछ सैंपल देखिये और इनकी हेडलाइंस पर गौर करें :- 

 

दिल्ली आजतक की लिंक, संबित पात्रा के ब्यान पर –

खुशी मना रही AAP ने शायद ठीक से नहीं पढ़ा SC का निर्णय: संबित पात्रा

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SC के फैसले से ‘अराजकता’ शब्द ले उड़ी BJP, केजरीवाल को ऐसे घेरा

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SC ने केजरीवाल सरकार को राहत के साथ दिए ये 3 तगड़े झटके-

पहला झटका: पूर्ण राज्य का दर्जा

अरविंद केजरीवाल काफी समय से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे. लेकिन आज सुनवाई में कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मुमकिन नहीं है. केजरीवाल का कहना था कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिले बगैर दिल्ली का समुचित विकास नहीं हो पा रहा, लेकिन कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया.

3. जारी रहेगी पूर्ण राज्य पर जंग

आम आदमी पार्टी की ओर से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को जोरशोर से उठाया गया है. लेकिन कोर्ट ने कहा है कि ये अभी भी मुमकिन नहीं है. मनीष सिसोदिया अभी भी कह रहे हैं कि हम पुलिस, जमीन, पब्लिक ऑर्डर को दिल्ली सरकार के अंतर्गत लाना चाहते हैं इसलिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे. ऐसे में सरकार और एलजी के बीच इसको लेकर टकराव देखने को मिल सकता है. क्योंकि अगर दिल्ली सरकार की ओर से किसी भी जमीन पर स्कूल, अस्पताल या अन्य किसी निर्माण के लिए जमीन की जरूरत होगी तो उन्हें एलजी के पास ही जाना होगा.

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