गलत जांच रिपोर्ट देने पर पैथ लैब को उपभोक्ता मंच ने माना दोषी, बिना पैथोलॉजिस्ट चल रही लैब्स के सर्वे के जिला कलक्टर को दिए निर्देश

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सीकर– जिला उपभोक्ता विवाद निवारण मंच ने एक परिवाद के निर्णय में पैथ लैब द्वारा उपभोक्ता की जांच रिपोर्ट गलत देने एवं उक्त जांच रिपोर्ट पर पैथोलॉजिस्ट के काउंटर सिग्नेचर न होने के कारण दोषी मानते हुए दण्डित किया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार ग्राम दिनवा के परिवादी ओम प्रकाश जांगिड़ ने डॉ.राजीव पैथलैब ईमेजिंग एलर्जी केयर सेंटर के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। जिसमें लैब द्वारा जारी उसके खून की जांच रिपोर्ट मिथ्या परिणाम अंकित कर गलत देना बताया। परिवादी ने दौराने बहस यह भी जाहिर किया कि उक्त लैब में जांच मात्र टेक्नीशियन द्वारा ही की जाती है तथा टेक्नीशियन ही लैब का संचालन कर रहा है। लैब में अधिकृत पैथोलॉजिस्ट नहीं है। परिवादी ने अपने स्वास्थ्य के साथ पैथ लैब द्वारा किए खिलवाड़ एवं सेवा में न्यूनता के कारण मंच से जांच रिपोर्ट की फीस, मानसिक संताप एवं मुकदमा खर्चा दिलाने की प्रार्थना की।
विपक्षी लैब के टेक्नीशियन ने स्वहस्ताक्षरित जांच रिपोर्ट को अत्याधुनिक मशीनों द्वारा की हुईं बताते हुए किसी भी त्रुटि को मशीनरी की त्रुटि होना बताया। साथ ही यह भी तर्क दिया कि मानव शरीर की ऊर्जा के अनुसार खून की जांच मे परिणाम भिन्नता स्वभाविक है। मानव शरीर में खून ट्रान्सफ्यूजन किये जाने पर हिमोग्लोबिन की मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। लिहाजा पैथ लैब दोषी नहीं है और लैब द्वारा सेवा में कोई न्यूनता कारित नहीं की गई है।
उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार अग्रवाल व सदस्य डॉ.प्रदीप कुमार जोशी ने परिवाद के निर्णय में माना कि उक्त पैथ लैब बिना पैथोलॉजिस्ट के संचालित की जा रही थी। लैब संचालक की पूर्व में मृत्यु होने के बाद टेक्नीशियन द्वारा अवैध रुप से लैब का संचालन कर जांच रिपोर्ट दी जा रही है, जबकि पैथ लैब संचालन के लिए अधिकृत पैथोलॉजिस्ट का होना जरुरी है। मंच ने अपने फैसले में गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व में दिए फैसले एवं सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की नजीर को उल्लेखित करते हुये माना कि लैब द्वारा परिवादी के खून की जांच कर सही रिपोर्ट नहीं दी गई, जो सेवा में न्यूनता है। इस रिपोर्ट पर पैथोलॉजिस्ट के काउंटर सिग्नेचर न होना नियम विरुद्ध है। उपभोक्ता मंच ने अप्रार्थी लैब को आदेश दिया कि वो आदेश दिनांक से एक माह में जांच रिपोर्ट पेटे ली गई राशि 600 रुपए, मानसिक संताप पेटे 30000 रुपए व परिवाद व्यय 10000 रुपए परिवादी को अदा करे। मंच ने इस निर्णय की प्रति सीकर व झुंझुनूं जिला कलक्टर को प्रेषित कर दोनों जिलों में बिना पैथोलॉजिस्ट के चल रही अवैध लेबों का सर्वे करवाकर उनके संचालन को प्रतिबंधित करने की अनुशंसा भी की है।

घर-घर में खुल गई लैब…

पिछले कुछ वर्षों में निजी पैथ लैब का धंधा तेजी से बढ़ा है। जिले में एमसीआई के नियमों के तहत अधिकांश लैब संचालित नहीं हो रही है। लैब संचालकों ने बताया कि पैथोलॉजिकल चीन में निर्मित होने के कारण जांच की मशीनें व उपकरण भारतीय उत्पाद के मुकाबले सस्ते हैं। लैब संचालको ने बताया कि अधिकतम चार लाख रुपए में मशीनें व उपकरण आ जाते हैं। जिले में सभी सीएचसी व पीएचसी तथा प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर के मकान या क्लीनिक के आसपास चल रही लैब में भी पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं। टेक्नीशियन ही रिपोर्ट जारी कर देते हैं। इन लैब में आरबीसीए ईएसआर, प्लेटलेट्स, सीबीसी, ब्लडिंग टाइम, फ्लोटिंग टाइम, हीमोग्लोबीन, ब्लड ग्रुप आदि की जांच होती है।

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