शिवराज सरकार टीवी और सोशल साइट्स को मानती है रेप का जिम्मेदार, लगेगा बैन

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भोपाल- देशभर में रेप की घटनाएं रुके न रुके लेकिन समय के साथ-साथ प्रदेश की सरकारों द्वारा अलग-अलग कानून बनते है, फिर भी भारत देश के 29 राज्यों में से किसी भी राज्य सरकार रेप की घटनाओं को रोक पाने में नाकाम रही है। हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई रेप की घटनाओं के बाद एमपी की शिवराज चौहान सरकार पहले पहले रेप के मामले में फांसी का कानून, रेप पीड़ितों को गन लाइसेंस देने का प्रस्ताव और अब सोशल साइट्स व टीवी पर बैन लगाने का प्रस्ताव लाने वाली है।

जन सुरक्षा अधिनियम के तहत अश्लीलता फेलाने वाले टीवी चैनलों और साइट्स पर बैन लगाने की तैयारी की जा रही है। एमपी सरकार इस कदम को रेप घटनाओ को रोकने के लिए कारगर उपाय मान रही है।

प्रदेश में महिला अपराधों के नंबर 1 होने के मामले में भले ही सरकार 100 फीसदी एफआईआर होने का तर्क देती है, लेकिन वास्तविकता ये है कि प्रदेश में महिलाएं में डर हैं। लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार अपराधियों को सजा देकर नहीं बल्कि इंटरनेट और टीवी को इसके लिए ज़िम्मेदार मानती है।

एमपी में रेप नहीं रुक रहे, और कानून बनने से पहले ही सीएम शिवराज सिंह चौहान का सम्मान भी हो गया। क्या सरकार टीवी और इंटरनेट को रेप का ज़िम्मेदार मानती है। अब सवाल ये है कि, क्या इन पर बैन करने से रेप की घटनाओ को रोक सकेंगे.
प्रदेश सीएम शिवराज चौहान ने भी कह चुके है कि इस तरह के अपराधों के लिए साइबर क्राइम और इंटरनेट काफी हद तक ज़िम्मेदार है।

मध्य प्रदेश में रेप की बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र सरकार हाल फिलहाल में कुछ कानून बना रही है और कुछ पर विचार चल रहा है। जिनमें प्रमुख इस प्रकार है…

1 -12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप की शिकायत पर फांसी की सजा का प्रावधान – कानून पर राष्ट्रपति की मुहर बाकी,
2- रेप पीडिताओं को गन लाईसेंस देने में प्राथमिकता – महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रस्ताव लंबित, और
3- टीवी चैनल्स और सोशल साइट्स पर बैन का प्रस्ताव – गृह विभाग का प्रस्ताव लंबित।

हालांकि अब ये सवाल जरूर है कि जो कानून अमल में आते ही नहीं, और सरकार उन पर वाह-वाही बटोर चुकी है। ऐसे में रेप रोकने के उपाय अमल में आएंगे या फिर दावों में सिमट कर रह जाएंगे ये बड़ा सवाल है।

नए प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस के मुताबिक प्रदेश में कानून बना देने से समाधान नहीं निकलेगा। जो मध्यप्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है उन पर सरकार वाहवाही बटोर रही है।

वहीं भाजपा का कहना है कि इस तरह के मामलों में गृह विभाग, विधि विभाग और आईटी विभाग मिलकर काम करते हैं, उन्ही की सिफारिशों के आधार पर कानून बनाए जाते हैं।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है और उसके लिए जो कानून बनाने होंगे सरकार बनाएगी। ये बात तो माननी होगी कि कानून अमल में आने से पहले उसका प्रचार-प्रसार शुरु हो जाता है. सीएम का सम्मान हो जाता है। लेकिन कानून अमल में कब आएगा और उससे अपराधी कब डरेंगे?, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है?

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