किसान आंदोलन की सही रिपोर्टिंग करने वाले न्यूज़ क्लिक के दफ्तर और स्टूडियो में ईडी का छापा |

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किसान आंदोलन की सही रिपोर्टिंग करने वाले न्यूज़ क्लिक के दफ्तर और स्टूडियो में ईडी का छापा |

क्या तमाम गोदी मीडिया के समर्थन के बावजूद कुछ ईमानदार पत्रकारों की आवाज से डर गए हैं मोदी ?
वैसे तो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने पहले से ही देश के ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक पर प्रिंट मीडिया पर अपना प्रभाव जमा रखा है, लेकिन हाल ही में चल रहे किसान आंदोलन में हमने देखा है की सरकार द्वारा प्रायोजित गोदी मीडिया की विश्वसनीयता धूमिल हो चुकी है | ज्यादातर लोग गोदी मीडिया के चैनलों चैनलों के बजाय ईमानदार पत्रकारिता के लिए जाने वाले जाने जाने वाले पत्रकारों जैसे कि रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम, आशुतोष व् पुण्य प्रसून वाजपाईये सरीखे यूट्यूब चैनलो के जरिए खबरें ले रहे हैं |

इस बदलते हुए स्वरूप में सरकार के लिए किसानों की आवाज को दबाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है | इसी कड़ी में लगता है सरकार जो कि किसान आंदोलन से डरी हुई है ,वह सख्त तानाशाही संदेश देना चाहती है|

क्या स्वतंत्र मीडिया पर इस तरीके की पाबंदी एक लोकतांत्रिक देश में संभव है ? अगर नहीं तो क्या भारत एक लोकतांत्रिक देश नहीं बचा है ?

जब सरकार अपने ही लोगों की आवाज को अनसुना कर दे तो आज के डिजिटल युग में क्या विकल्प रह जाता है ? न्यूज़क्लिक जैसे मीडिया संस्थान के ऊपर ईडी का छापा सरकार की नाकामी को दर्शाता है, व गोदी मीडिया के ऊपर संपूर्ण निर्भरता को चुनौती देने वाली सोशल मीडिया की आवाजों को दबाने के एक प्रयत्न के रूप में देखा जा सकता है |

अगर हम अभी नहीं जागे तो हो सकता है कि आने वाले समय में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के दर्शन ही दुर्लभ हो जाएं |

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