ग्राउंड रिपोर्ट : कागजों पर गांव हो गए खुले में शौच से मुक्त, जमीनी हकीकत में ओडीएफ नहीं बल्कि है गंदगी

ग्राउंड रिपोर्ट : एक तरफ सरकार गांव को खुले में शौच से मुक्त ओडीएफ के लिए अभियान चलाकर समाज से इस बीमारी को दूर करने का प्रयास कर रही है, वहीं इस्तेमाल लायक नहीं है हजारों की लागत से बने शौचालय, कैसे पूरा होगा खुले में शौच मुक्त भारत का सपना.

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सीकर। एक तरफ केन्द्र व प्रदेश सरकार गांवों को खुले से शौच मुक्त ओडीएफ बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। सरकार समय-समय पर समाज से इस बीमारी को दूर करने का प्रयास अभियान चलाकर कर रही है। गावों को खुले से शौच से मुक्त करने का प्रशासन का दावा महज कागजों तक ही सिमट कर रह गया है। पंचायत अधिकारी और सरपंचों की आपसी मिलीभगत से विभागीय अधिकारी महज वाहवाही लूटने के लिए मनगढ़त आंकड़ों से गांवों को ओडीएफ करवाने वाले प्रशासन की कारगुजारी हाल ही में जिला परिषद की ओर से करवाए गए आंकलन में सामने आई है, आंकलन में आये डाटा के अनुसार जिले में करीब 25 हजार से अधिक परिवारों को अभी भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।

घर में सुविधा है लेकिन फिर भी बोतल भर सड़क किनारे ही जायेंगे…

आपको बता दे कि जिला परिषद के आंकलन से खुले में शौच जाने वालों के आंकड़ों की जो सच्चाई सामने आई तो सभी ग्राम पंचायतों को पाबंद करना शुरू कर दिया है और लापरवाही बर्ती जाने पर उनके खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है। यहां तक प्रतिमाह लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार के नाम पर प्रतिमाह लाखों रुपये पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन जिम्मेदारों को गांव की यह दुर्दशा नहीं दिखती, जिससे आज भी लाखों रुपये खर्च होने के बाद ग्रामीण खुले में शौच जाने के लिए विवश है। ऐसे में कैसे पूरा होगा खुले में शौच मुक्त भारत का सपना, जब इस्तेमाल लायक नहीं है हजारों की लागत से बने शौचालय।

फर्जीवाड़े से सरकारी सहायता तो प्राप्त कर ली…

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिला ओडीएफ खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद भी कुछ लोग जानबूझकर शौचालय का उपयोग नहीं कर रहे है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में सभी पात्र परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए ₹12000 की सरकारी सहायता दी गई थी, जिसमें कुछ लोगों ने शौचालय की फर्जी फोटो लगाकर सरकारी सहायता तो प्राप्त कर ली, लेकिन उपयोग लेने योग्य शौचालय नहीं बना पाए। और कुछ लोग जानबूझकर गांव की आबादी और सड़कों के नजदीक गंदगी फैला रहे है।

सूची से होंगे वंचित…

सीईओ ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए जिला परिषद ने सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव को निर्देश दिया है कि ऐसे व्यक्तियों पर पंचायती राज अधिनियम की धारा 62 के तहत ₹200 जुर्माना तथा पुनरावृति पर प्रतिदिन ₹10 अतिरिक्त जुर्माना वसूलने के लिए कहा गया है।

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