आंधी तूफान में घायल हुए मरीजों को नहीं मिला मुफ्त इलाज

20 से अधिक मरीज एसएमएस में हुए थे भर्ती, इनसे इलाज और दवा की राशि वसूली जा रही है

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जयपुर: प्रदेशभर में आंधी तूफान को एक तरफ जहां सरकार आर्थिक मदद देने की घोषणा कर रही है। वहीं दूसरी ओर इलाज के लिए राजधानी मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती होने आए लोगों से दवा और जांच के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं।

राज्य सरकार ने घायलों को फ्री इलाज करने के निर्देश दिए थे। आंधी तूफान में घायल 20 से अधिक मरीज गुरुवार और शुक्रवार को एसएमएस में भर्ती हुए थे। इनमें से कुछ इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर प्राइवेट अस्पताल में चले गए। वर्तमान में करीब 10 से अधिक मरीज ट्रॉमा, ऑर्थो और न्यूरो वार्ड में भर्ती है। इनसे इलाज और दवाई की राशि वसूली जा रही है।

ट्रॉमा में भर्ती चंचल के पिता बिल्लू सिंह ने बताया कि पिछले 3 दिन में जांच और दवाई में ₹11000 से ज्यादा खर्च हो गए हैं। चंचल मेहंदीपुर बालाजी की रहने वाली है और उनके पिता बिजली फिटिंग का काम करते हैं। इसी प्रकार पेड़ के नीचे दबकर घायल हुए बहरोड़ निवासी राजपाल तूफान के समय पेट के नीचे खड़े थे। पेड़ के राजपाल दब गया और पसलियों में फैक्चर हो गया। अस्पताल में जांच में ₹6000 से अधिक राशि खर्च हो गई है। कुछ ऐसा ही वाकया अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के साथ भी हुआ है।

इनसे वसूली जांच और दवाई की राशि…

अस्पताल में कल्याण सिंह सिटी वार्ड, पायल, न्यूरो सर्जरी वार्ड, मुकेश ऑर्थो, दिलीप, राजपाल और चंचल ट्रॉमा वार्ड में भर्ती है। ये सभी 2 मई को आए आंधी तूफान में पेड़, दीवार और अन्य सामान गिरने से घायल हो गए थे। आसपास के अस्पतालों में इलाज संभव नहीं होने पर एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया। जहां प्रशासन ने जांच और दवाई के नाम पर हजारों रुपए वसूल लिए।

ट्रॉमा में लगे कर्मचारियों ने गलतीवश तूफान पीड़ित मरीजों से जांच और दवाई की राशि ले ली थी। जानकारी के बाद उन्हें वापस राशि दिलाने के आदेश जारी कर दिए हैं। रूटीन मरीजों की वजह से तूफान पीड़ितों की पहचान नहीं हो पाई थी: डॉ डी एस मीणा, अधीक्षक एसएमएस अस्पताल.

शुरुआत में मुझे इस बारे में जानकारी नहीं थी। मामला सामने आने के बाद मैंने अधीक्षक को मरीजों के परिवार वालों से ली गई राशि को वापस से लौटाने के निर्देश दिए थे। अधीक्षक ने राशि लौटाई या नहीं इस बारे में मुझे अधिक जानकारी नहीं: डॉ यूएस अग्रवाल, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज जयपुर.

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