शांतिपूर्ण रेल रोको आंदोलन में किसानो ने देश का दिल जीत लिया |

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शांतिपूर्ण रेल रोको आंदोलन में किसानो ने देश का दिल जीत लिया |

आज दिनांक 18 फरवरी को हुए देशव्यापी रेल रोको आंदोलन में देश के किसानों ने देश का दिल जीत लिया | स्वयं अपने आप में एक अभूतपूर्व आंदोलन जिसका आह्वान स्वयं देश के किसानों ने किया था, आज संपूर्ण भारतवर्ष जिसमें कि चाहे आंदोलन का केंद्र बिंदु रहे पंजाब, हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, राजस्थान की जगह हो या चाहे दक्षिण भारत में तमिलनाडु, कर्नाटका समेत केरल में किसानों की मजबूत उपस्थिति हो या पश्चिम बंगाल की बात हो|

दोपहर 12:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक संपूर्ण रुप से देश में ट्रेन रुकी रही | आज के आंदोलन की खास बात यह रही की यह साधारणतया राजनीतिक पार्टियों द्वारा बुलाए जाने वाले रेल रोको जैसा बिल्कुल भी नहीं था | इसमें न कोई हिंसा हुई, न कोई तोड़फोड़ हुई और किसानों ने आगे बढ़कर जिन यात्रियों को कष्ट हुआ उनसे हाथ जोड़कर अपनी बात से अवगत कराया व परेशानी के लिए माफी भी मांगी | देश के कई हिस्सों में किसानों ने रुकी हुई ट्रेन में यात्रियों के खानपान की भी संपूर्ण व्यवस्था की थी, व कई ट्रेन चालकों को गुलाब के फूल भी भेंट किए गए |

NDTV की रिपोर्ट –

आपसी भाईचारे की ऐसी मिसाल व आंदोलन का इतना सुंदर रूप शायद ही विगत कुछ दशकों में भारतीय जनता ने देखा होगा | आज किसानों ने फिर से सिद्ध कर दिया है कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार की तरफ से ही साजिशें हो सकती हैं, लेकिन किसान कभी भी देश के नागरिकों का बुरा नहीं सोच सकता |

इसी क्रम में आंदोलन को पुनर्जीवित करते हुए एक बार फिर मोदी सरकार पर पूर्णतया दबाव बनने लगा है, जिसकी झलक केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रियों व मीडिया सूत्रों के अनुसार कई RSS नेताओं में भी खलबली देखी जा सकती है | अब चूँकि भाजपा के साथ-साथ लोगों ने RSS पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिये है, जिससे आने वाले समय में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए 3 कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा कोई और चारा बचने के आसार नहीं लगते हैं |

NewsClick की रिपोर्ट –

अभी हाल ही में संपन्न पंजाब में स्थानीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार को किसान आंदोलन से उपजे असंतोष के नतीजे के रूप में देखा जा रहा है | अभी भारतीय जनता पार्टी इसी बात को लेकर आशंकित है कि यदि अभी जो यह आंदोलन चार पांच राज्यों तक फैला हुआ है, अगर वह संपूर्ण भारत स्तर पर इसी गति से बढ़ता गया तो कुछ चंद व्यापारी मित्रों के हित साधने के चक्कर में कहीं सत्ता से हाथ न गंवाना पड़ जाए |