बनारस पुल हादसा एक्ट ऑफ गॉड या फ्रॉड?, जनता ने मोदी से पूछा

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वाराणसी : वाराणसी में उत्तर प्रदेश सेतु निगम के पुल का गर्डर गिरने से 18 लोगों की मौत के बाद सोशल मीडिया पर बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया के निशाने पर आ गए है। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के पश्चिम बंगाल के मदारीहाट में 7 अप्रैल, 2016 के दिए बयान को शेयर करके पूछा रहा है कि वाराणसी में पुल हादसा एक्ट ऑफ गॉड है या एक्ट ऑफ फ्रॉड। आपको याद दिला दें कि 2016 में 31 मार्च को कोलकाता में एक पुल गिर गया था जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई और तब पुल बनाने वाली हैदराबाद की कंपनी आईवीआरसीएल लिमिटेड ने कहा था कि ये दैवीय हादसा यानी एक्ट ऑफ गॉड है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने बंगाल में अपनी सभा में कहा था कि ये एक्ट ऑफ गॉड नहीं बल्कि एक्ट ऑफ फ्रॉड है।

 

गौरतलब है कि मंगलवार शाम 5:20 के करीब कैंट रेलवे स्टेशन के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा टूटकर गिर गया जिसकी चपेट में आने से 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। पुल के इस हिस्से के नीचे बस, और कार समेत कई दुपहिया वाहन दब गए। जिस जगह पर ये हादसा हुआ वो जगह बनारस से कई जिलों को जोड़ती है। इसी रोड़ से भदोही, इलाहाबाद के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र होते मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तक जाने वाले लोगों का आना जाना होता है। इसी सड़क पर कमर्शियल वाहन भी चलते है।

यही वजह है कि इस सड़क पर अमूमन जाम सरीखे की स्थिति बनी रहती है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त वहां का मंजर रहा होगा। हादसे के बाद हर बाद सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी दुख जताते हुए मुआवजे का एलान कर दिया और दो-चार अधिकारियों को सस्पेंड कर एक जांच कमेटी बिठा दी। लेकिन सवाल ये है कि क्या दुख जताने से और मुआवजे की राशि से उस परिवार का दुख-तकलीफें कम होती है जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया?

सड़क पर चलने वाले उन लोगों की क्या गलती थी? ये तो वही जनता थी जिनके टैक्स के पैसे से ये पुल बन रहा था। जो माचिस से लेकर हवाई जहाज तक खरीदते वक्त टैक्स देता है ताकि सरकार उसे बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं मुहैया कराए। लेकिन सरकार जो भी हो हर बार मरता वही आम आदमी है जिसने इस विश्वास के साथ सरकार को चुना होता है कि वो उसकी सुरक्षा करेगी, शहर का विकास करेगी लेकिन हर बार उसके साथ धोखा होता है।

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