फिर उठे जज लोया की मौत पर सवाल, SC में पुनर्विचार याचिका दाखिल

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गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई कोर्ट के जज बीएच लोया की मौत का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।मामले में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सोमवार को इस केस की जांच के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। एसोसिएशन का कहना है कि कोर्ट ने फैसला देते वक़्त कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया था।

यह याचिका वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने दायर की है जिसमें अदालत के उन निष्कर्षों को हटाने की भी मांग की गई। जिसमें कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि न्यायपालिका की आजादी पर हमला और न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

दरअसल इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते महीने जज लोया के मौत के मामले की एसअाईटी से जांच कराने की मांग वाली एक याचिका को ठुकरा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब जस्टिस लोया केस में कुछ नहीं है। आगे कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस मामले को देख रहे जजों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। याचिकाकर्ताओं की मंशा न्यायपालिका को खराब करना है।

गौरतलब है कि जज लोया कि दिसंबर, 2014 में नागपुर में मौत हो गई थी, जिसे संदिग्ध माना गया था। जिसके बाद इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि जज लोया के केस में जांच के लिए दी गई अर्जी में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा था कि जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है और उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा होगा। कोर्ट ने जस्टिस लोया की मौत से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने राजनीतिक दलों को फटकार लगाते हुए कहा था कि राजनीतिक हित के लिए पीआईएल का गलत उपयोग कर अदालत का समय बर्बाद किया जा रहा है।

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