पीठ पर वार करने वाले कायरों, तुम ही बताओं आज उस मां को क्या जवाब दू- कवयित्री शिल्पी कुमारी

अगर तुम्हारे दिल में हिंदुस्तान है तो शहीदों का सम्मान करो, उन बेशर्म आतंकियों ने शहादत का अपमान किया है...

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उदयपुर – पुलवामा आतंकी हमले का विरोध व घोर निंदा करते हुए ‘बेटा पढ़ाओ – संस्कार सिखाओं’ अभियान की आगाजकर्ता व लेखिका की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली उदयपुर निवासी कवयित्री शिल्पी कुमारी ने कहा कि अरे वो अपनापन का दिखावा कर, पीठ पर वार करने वाले कायरों! तुम ही बताओं आज उस मां को क्या जवाब दू?, जिसके रहते बेटा जल गया। और उस पिता को क्या जवाब दू?, जिसके बुढ़ापे का सहारा छीन गया।

अरे ओ धूर्तों, अब तुम ही बताओ उस नन्हीं सी बिटिया से क्या कहूँ?, जो माँग रही है सबसे अपना पिता। अभी तो उसका बचपन बाकी है, कैसे कहूँ?, उससे की तुम्हारे नापाक इरादों ने छीन लिया?, उससे उसका प्यारा बाबुल। अब अपनी विदाई में वह किसके सीने से लिपटकर रोयेगी।

अरे वो घर के भेदी जब तुम अपने देश का नमक खाकर अपने देश के सारे भेद दुश्मनों को बता रहे थे, तो क्या?, तुमनें उस बेटे के बारे में नहीं सोचा?, जिसने अभी तक दुनियादारी सीखी ही नहीं और उसका पिता गुजर गया। कितना बेबस और लाचार होगा वह बेटा जो अपने पिता के सीने से लगकर रो भी नहीं पाया होगा। क्योंकि उसके पिता का शव क्षत-विक्षत हो चुका था।
क्या तुम्हारी रूह तुम्हें कोसती नहीं। एक बार तो बता दो मुझे क्या कहूँ उस शहीद की विधवा से जीसकी माँग तुमनें धोखे से उजारी है। उस पत्नी की उजरी माँग प्रश्न कर रही है तुमसे।

हे देश की सत्ताधारियों और अनेक दलों के पदाधिकारियों अब तो जागो। वो देशद्रोही और शहीदों का खूनी, वह बेरहम घातक आतंकी अब भी कहीं सुकून से सो रहा है।
तुम छीन लो उस देशद्रोही का सुकून जो बता आया दुश्मन को की वीर जवानों की गाड़ी बुलट प्रूफ नहीं। उस रावण ने एक बार भी नहीं देखा उस पिता का हाल जिसके छः फुट के बेटे की मिली डेढ़ इंच की लाश।
आज शहीदों की रूह व्यथित हो रही है क्योंकि अगर वह सिमा पर युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो जाते तो उन्हें अपने बलिदान पर गर्व होता । लेकिन उन बेशर्म आतंकियों ने शहादत का अपमान किया है। उन्होंने वीरो पर छुपकर गीदड़ की भाँति धोखे से वार किया है। जब उन्होंने दुश्मनी के नियमों को तार-तार किया है, तो अब तुम क्यों नियमों की बेड़ियों से बंधे हो। आज प्रत्येक भारतवासी के ह्रदय में प्रतिशोध की ज्वाला भड़क रही है और अब कोई धारा-370 इस ज्वाला को शान्त नहीं कर सकता।

अब वीर शहीदों को मारने वाले खुनी आतंकियों को माफ करना या न करना शहीदों और ईश्वर का फैसला होगा। पर उन धूर्तो को उन तक पहुंचना हमारा कर्तव्य है। आज देश का प्रत्येक नागरिक केन्द्र से गुहार कर रहा है। माननीय मंत्री जी तोड़ दीजिए धाराओं की दीवार और हमारे वीर जवानों को यह अधिकार दीजिए कि वह दुश्मन के घर में घुसकर अपने वीर भाइयों का प्रतिशोध ले सके।

आज देश, पक्ष और विपक्ष के सभी सत्ताधारियों से निवेदन कर रहा है कि अगर तुम्हारे दिल में हिंदुस्तान है तो शहीदों का सम्मान करो। अब कोई सत्ता का खेल नहीं दुश्मन का सँहार करो। अब तो तुम शहीदों का सम्मान करो।

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