किसान आंदोलन से सरकार असमंजस में, RSS परेशान !

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किसान आंदोलन से सरकार असमंजस में, RSS परेशान !

विगत 87 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन ने भारत देश में कुछ आमूलचूल परिवर्तन होते देखे हैं, जिसमें से की एक भारतीय सामाजिक संरचना में दखल रखने वाली RSS की कट्टर हिंदुत्ववादी सोच भी शामिल है | लगातार कट्टरता पनपा रही RSS अभी चल रहे किसान आंदोलन में भाग ना लेने से उसकी इमेज सिर्फ भाजपा सरकार के इशारों पर चलने वाली एक संस्था मात्र के रूप में हो चुकी है|

क्या बदला इस किसान आंदोलन के दौरान ?

पिछले कई दशकों से RSS को दाना पानी मुख्यतः कट्टर हिंदुत्व की सोच रखने वाले व समाज के विभिन्न समुदायों में नफरत बोने के आधार पर मिलती रही है | पिछले दो लोकसभा चुनाव में विभिन्न अन्य मुद्दों के साथ RSS इस मुद्दे को भी बखूबी भुनाया जिसके चलते 2 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत भी हुई | लेकिन लेकिन अभी वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन, जिसकी गूंज एक राज्य में नहीं, कुछ राज्यों में नहीं बल्कि विश्व स्तर पर स्पष्ट सुनाई दे रही है,ने उसके समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं|

किसान आंदोलन ने किया RSS के कट्टर हिंदुत्व वह फर्जी राष्ट्रवाद को बेनकाब| आखिरकार RSS को क्यों महंगी पड़ेगी किसानों को अनदेखा करना ?

RSS ने हमेशा ही समस्त हिंदुओं को एक होने की अपील की| देश के बजाय धर्म को ज्यादा मेहता दी और विश्व में बहुतेरे उदाहरण मौजूद हैं कि जब जब किसी मुल्क में एक धर्म विशेष की को समर्थन किया, तब मुल्क आपस में बंटने के कारण कभी भी अपने संपूर्ण सामर्थ्य के अनुसार विकास नहीं कर पाया | लेकिन विभिन्न षड्यंत्रों व जालसाजी के चलते भारत देश में ऐसा चलता गया जिसका नतीजा आज किसान आंदोलन के समय स्पष्ट दिख रहा है |

मीडिया में उपलब्ध विभिन्न रिपोर्ट्स में किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब RSS के जातिवादी वह धार्मिक नफरत को त्याग कर भाईचारे की मिसाल पेश करेंगे | अब RSS का सामाजिक वजूद मात्र सत्ता के कुछ लोलुप व्यक्तियों की सेवा में लगने वाले एक छोटे संगठन के तौर पर ही देखा जा सकता है,जो कि भारतीय लोकतंत्र वह देश में आपसी भाईचारे के लिए अत्यंत ही आवश्यक है|