राजस्थान: B.Ed/JBT से पहले RTET मान्य, डबल बेंच में सरकार की हार

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जयपुर- राजस्थान उच्च न्यायालय की संयुक्त पीठ ने तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2016 से जुड़े एक मामले में फैसला दिया है कि विद्यार्थी के लिए कोई ऐसी बाध्यता नही होनी चाहिए कि वह RTET को बी.एड/JBT के बाद ही उत्तीर्ण करे |

क्या है पूरा मामला 

शिक्षा निदेशालय बीकानेर और सभी जिला परिषदों द्वारा तृतीय श्रेणी भर्ती 2016 की प्रकिर्या चलाई जा रही है जिसमे की लेवल -1 में एक अभ्यर्थी को दस्तावेज सत्यापन में केवल इस लिए बाहर कर दिया कि उसने RTET , JBT से पहले किया है | छात्र आशीष शर्मा ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की जिसमे की सरकार ने छात्र के हित में फैसला दिया और शिक्षा निदेशालय तथा संबंधित जिला परिषद को आगे की कारवाई छात्र के हित में करने और नियुक्ति करवाने को निर्देश दिया |

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अगस्त 2017 में छात्र ने उक्त आदेश की प्रति शिक्षा निदेशालय व् अपनी जिला परिषद को दी लेकिन निदेशालय ने कोई फैसला नही लिया जिसके चलते छात्र को नियुक्ति से वंचित रखा गया | छात्र ने उच्च न्यायालय में अवमानना का मामला भी प्रस्तुत किया लेकिन इसी दौरान सरकार (शिक्षा निदेशालय बीकानेर) ने डबल बेंच जाने का मन बना लिया | सरकार की तरफ से डबल बेंच में पूर्व के आदेश को चुनौती दी गयी लेकिन उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने 7 मार्च 2018 के आदेश में साफ़ कहा कि इस अपील की कोई आवश्यकता ही नही है, और सरकार छात्रो को ऐसे किसी योग्यता को बाद में या पहले अर्जित करने के लिए बाध्य नही कर सकती |

अन्य अभ्यर्थियों को भी होगा फायदा 

आशीष शर्मा का मामला इसी अध्यापक भर्ती (2016) के लेवल 1 का था, आशीष के मामले में दिए गये न्यायालय आदेश के सन्दर्भ में ही अन्य छात्रो ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की जिनमे न्यायालय ने छात्रो के हित में फैसला दिया और आशीष के मामले को आधार बनाया , लेकिन सरकार आशीष के मामले को लेकर डबल बेंच में जा चुकी थी इस लिए सरकार ने सभी अन्य अभ्यर्थियों के साथ भी वैसा ही किया और उन्हें दस्तावेज सत्यापन से बहार कर दिया तथा नियुक्ति प्रकिर्या से वंचित कर दिया |

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RAJ HIGH COURT

अब डबल बेंच में अभ्यर्थियों के हित में फैसला आने से अन्य अभ्यर्थियों को भी बड़ी रहत मिली है , अन्य छात्रो में कुछ अभ्यर्थी तो लेवल 1 से है और कुछ अभ्यर्थी लेवल  2 से |

आखिर किसका किसका नुक्सान

जनता को सोचना होगा कि एक निराधार मामले को सरकार बार-बार अलग अलग न्यायालयों में लेकर जा रही है और हर बार सरकार की हार हो रही है लेकिन फिर भी सरकार बाज़ नही आ रही | क्या जनता से टैक्स के रूप में ली जा रही मेहनत की कमाई को ऐसे बर्बाद नही किया जा रहा है | क्या सरकार इन प्रश्नों का जवाब देगी ??

अब तक कितना पैसा सरकार अभ्यर्थियों के खिलाफ केस लड़ने में लगा चुकी है ?

केस की ड्यूटी में कितने दिन अधिकारी ऑफिस से गायब रहे है ? 

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