जज बीएच लोया की मौत की नहीं होगी एसआईटी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

जज बीएच लोया की 2014 में सहकर्मी की बेटी की शादी में शरीक होने जाते समय मौत हो गई थी, उस समय वे सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपित थे...

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नई दिल्ली– सीबीआई के स्पेशल जज ब्रजगोपाल हरकिशन लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जज बीएच लोया की मौत मामले की दोबारा जाँच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुई थी। इन याचिकाओं पर 16 मार्च को सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रेल तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई जांच नहीं होगी, केस में कोई आधार नहीं है। इस मामले के जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि 4 जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है। उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा होगा।

इन लोगों ने दायर की थी याचिकाएं…

मीडिया में मामला आने के बाद जज लोया की मौत की दोबारा जांच की मांग उठने लगी। कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य कई लोगों की ओर से जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली दायर याचिकाओं पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने फैसला सुनाया।

कब उठा था जज बीएच लोया की मौत का मामला?

दरअसल आपको बता दे कि बीएच लोया की मोत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में अपने सहकर्मी के बेटी की शादी में शरीक होने जाते समय हुई थी। कहा जाता है कि जज लोया मोत कार्डिएक अरेस्ट (दिल का दौरा) आने से हुई थी। सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया उस समय सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपित थे।

नवंबर 2017 में बीएच लोया की मोत पर उसकी बहन ने संदिग्ध जाहिर करते हुए कहा कि उनकी मोत प्राकृतिक नहीं थी। इसके बाद यह मामला जोर-शोर के साथ उठा और उसके तार सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर से जोड़ते हुए उनकी मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की। जिसके बाद यह केस मीडिया की सुर्खियां बना।

प्रशांत भूषण ने कहा, यह काला दिन…

प्रशांत भूषण ने कहा कि हमारे लिए आज का यह सबसे अधिक काला दिन है। भूषण ने कहा कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि 4 जजों का कोई एफिडेविट पर बयान तक सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आया था, फिर भी उनके आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ईसीजी और हिस्टोपैथॉलजी की रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत की बात नहीं कही गई है, लेकिन बिना एफिडेविट के जजों के बयान के आधार पर मांग खारिज करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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