अमित शाह के एक फोन कॉल से बदल गया शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का अविश्वास प्रस्ताव पर मूड

783

 

नई दिल्ली. मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में कल यानि शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाना है। ऐसे में जहां कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ पूरी तरह से एकजुट दिखाई दे रहे है। वहीं एनडीए गठबंधन से बगावत करने वाली शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव में मोदी सरकार के पक्ष में वोटिंग करने का निर्णय किया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वह अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ है और बीजेपी के समर्थन में वोटिंग करेगी।

कैसे बदला शिवसेना के ठाकरे ने अपना मूड…

ऐसा कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने यह फैसला बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का दूरभाष के द्वारा बातचीत होने के बाद लिया है। आपको बता दें कि बीच में पिछले दिनों एनडीए के बीजेपी और शिवसेना पार्टी के बीच के रिश्तों में कुछ दरारें दिखाई देने लगी थी और कहा जा रहा था कि जल्द शिवसेना एनडीए से अलग होगी। और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कई बार यह भी बयान दिया था कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन अब अब एक बार दुबारा से दोनों पार्टियों के बीच सबंध मधुर होते हुए दिख रहे है।

लोकसभा में मौजूदा दलों के सदस्यों का आंकड़ा…

आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अड़ी टीडीपी ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही है। 545 सदस्यों वाली लोकसभा में मौजूदा समय में कुल 535 सदस्य है। और मौजूदा सत्ताधारी दल बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए महज 267 सांसद चाहिए।

अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में समर्थित पार्टियां…

बीजेपी के पास लोकसभा में 273 सदस्य है यानि बहुमत से भी 6 ज्यादा, और इसके अलावा एनडीए के सहयोगी दलों में शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4, आरएलएसपी के 3, जेडीयू के 2 और अपना दल के 2 समेत अन्य के 6 सदस्य है। इस तरह से मोदी सरकार के समर्थन में सभी दलों को मिलाकर कुल संख्या 314 पहुंच रही है। यानि यह पूरी तरह से संभव है कि बीजेपी को अविश्वास प्रस्ताव को गिराने और सरकार को बचाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

मगर फिर भी बीजेपी के समक्ष सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उसके कुछ नेताओं ने पार्टी के खिलाफ बगावत का रुख अपना रखा है, ऐसे में ये नेता सरकार के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकते है। इन बागी नेताओं में शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और सावित्री बाई फुले समेत ओर भी कई सांसद शामिल है। अगर हम ये मानकर चलें कि ये तीनों नेता अगर बगावत पर उतर आते है तो भी मोदी सरकार पूर्ण बहुमत की स्थिति में रहेगी।

अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में विपक्षी पार्टियां…

मौजूदा समय में विपक्षी दलों की लोकसभा में सर्वाधिक सीटें 48 कांग्रेस के पास है और वहीं अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली पार्टी टीडीपी के पास 16 सीटें है। जबकि जेडीएस के पास 1, एनसीपी के पास 7, आरजेडी के पास 4, टीएमसी के पास 34, सीपीआईएम के पास 9, सपा के पास 7, आप के पास 4, टीआरएस के पास 11, वाईएसआर कांग्रेस के पास 4, एयूडीएफ के पास 3 और बीजेडी के पास 20 सीटों के साथ अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में खड़ी है। अगर इस सभी पार्टियों को मिला दिया जाए तो भी ये 268 के आंकड़े को छू नहीं पा रहे है। इस तरह यह आईने की तरह साफ है कि अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने वाली पार्टियों को लोकसभा में मुंह की खानी पड़ेगी।

टीडीपी सांसद ने की बगावत…

अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा में लाने वाली पार्टी टीडीपी के सांसद जेसी दिवाकर रेड्डी ने प्रस्ताव से ठीक पहले पार्टी के खिलाफ बगावती शुर दिखाने शुरू कर दिए है। रेड्डी ने अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस और वोटिंग से दूर रहने का ऐलान किया है। सांसद के इस रवैये को देखते हुए पार्टी प्रमुख और आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने अपने सभी सांसदों को पत्र लिखकर सदन में उपस्थित रहने और वोटिंग में हिस्सा लेने को कहा है। अब देखना यह है कि आखिर जीत का स्वाद कौन चखेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here