पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण को रोकने का उपाय – देखें !!

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पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण को रोकने का उपाय – देखें !!

उत्तर भारत के कई हिस्से धुएं के प्रदूषण से परेशान हैं।
किसान बेसहारा तथा आवारा गोवंश से परेशान है।
तारबंदी पर लाखों रुपए खर्च करने पर भी अपने फैसले नहीं बचा पाता है।
गोवंश भूखा-प्यासा इधर उधर भटक रहा है और तड़प तड़प कर मर रहा है।
सरकार गोवंश संरक्षण के लिए टैक्स वसूल रही है पर गोवंश के लिए कुछ भी सार्थक नहीं कर रही है।
चावल उगाने वाले किसान पराली की समस्या से ग्रस्त हैं, तथा जनता पराली के जलाए जाने पर धुए से त्रस्त है।
इन सब का सरल सा उपाय है, पर कोई भी इस पर विचार नहीं कर रहा है। हमारे पास ऐसी मशीनें हैं जो पराली की हारवेस्टिंग कर उसकी गांठ बना देती हैं जिसे आसानी से ट्रकों द्वारा परिवहन किया जा सकता है। हर तहसील में गोवंश के लिए एक जगह आरक्षित की जावे जो कि कम से कम 100 हेक्टेयर हो, वहां इस पराली को भेज कर तथा गोवंश के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था की जा सकती है। गांव में गौशाला न बनाकर ट्रकों द्वारा जहां भी आवारा गोवंश हो उसे इन आरक्षित स्थानों पर छोड़ देना चाहिए। यह सब करने के लिए हमसे गोवंश संरक्षण के लिए जो टैक्स लिया जा रहा है उससे उपरोक्त व्यवस्था की जा सकती है।

पराली को इकट्ठा करने के लिए जो मशीन काम में ली जा सकती है उसका विडियो –

लेखक चिरंजीलाल महरिया, बिट्स पिलानी से स्नातक इंजीनियर व् वर्तमान में आम आदमी पार्टी की सीकर जिले की इकाई के अध्यक्ष हैं |

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