मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला सुनाने वाले जज रवींद्र रेड्डी ने दिया इस्तीफा, खड़े हुए कई सवाल

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आतंकवाद रोधी विशेष अदालत ने 11 साल पहले 2007 में हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में हुए बम ब्लास्ट केस का फैसला सुनाने वाले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के न्यायाधीश रवींद्र रेड्डी ने सभी को चौंकाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे इस्तीफा देने के बाद छुट्टी पर चले गए है और उनके इस्तीफे के बाद कई सवाल खड़े हो गए है।

निजी वजहों से दिया इस्तीफा…

रेड्डी ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपना इस्तीफा भेजा है। रेड्डी के इस्तीफे के कारणों का पता नहीं चल सका है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने उन्होंने अपने इस्तीफे में निजी कारणों का हवाला दिया है और इसके बाद वह लंबी छुट्टी पर भी चले गए है। पहले यह खबर सामने आई कि उन्होंने 10 दिन की छुट्टी ली है लेकिन उन्होंने फैसले के तुरंत बाद इस्तीफा दे दिया। वहीं ​हैदराबाद पुलिस ने इस फैसले के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर पुलिस और अर्धसैनिक बल के 3,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया।

जज रेड्डी के अचानक इस्तीफे की एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्वीट कर हैरानी जताई है, और उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा हैरान करने वाला है और संदेह भी पैदा करता है।

यह है मामला…

आपको जानकारी के लिए बता दें कि इस धमाके में 9 लोगों की मौत और 58 लोग घायल हुए थे। मामले में 10 आरोपियों में से 8 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें नबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी, उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर है और तीन लोग जेल में बंद है। एक आरोपी सुनील जोशी की जांच के दौरान हत्या कर दी गई थी।

2007 में जुमे की नमाज के दौरान हुए मक्का मस्जिद धमाके के मामले में सोमवार को एनआईए की विशेष कोर्ट ने फैसला सुनाया। बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों को बरी कर दिया गया।

ब्लास्ट मामले में सीबीआई ने सबसे पहले असीमानंद को गिरफ्तार किया था…

ब्लास्ट मामले में दो और आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसंग्रा के बारे में मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया है कि उनकी भी हत्या कर दी गई है। ब्लास्ट मामले में सीबीआई ने सबसे पहले 2010 में असीमानंद को गिरफ्तार किया था लेकिन 2017 में उन्हें सशर्त जमानत मिल गई थी। उन्हें 2014 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में भी जमानत मिल गई थी।

आपको बता दें कि पिछले 11 साल में इस मामले में कई तरह के नाटकीय मोड़ आए। जिसमे जांच के दौरान कई गवाहों ने अपने बयान से पलटी मारी और असीमानंद ने भी कई बार अपने बयान बदले थे। असीमानंद ने पहले आरोपों को स्वीकार किया और बाद में साजिश रचने की भूमिका में शामिल होने से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि 18 मई 2007 को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट पर प्रार्थना के दौरान धमाका हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, बाद में ये चारों लोग भी जिंदगी से जंग हार गये थे।

मक्का मस्जिद में धमाके के समय वहां 10 हजार लोग मौजूद थे। वहां दो जिंदा बम भी बरामद हुए थे जिसे हैदराबाद पुलिस ने निष्क्रिय कर दिया था। बाद में इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन फिर यह मामला NIA के पास चला गया। एजेंसी ने 226 अभियोजन पक्ष के गवाहों को सूचीबद्ध किया था जिसमें से 64 बदल गए थे।

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