मोदी सरकार का कमाल, अब काले धन से होगी राजनीतिक पार्टियों की बल्ले-बल्ले – इलेक्टोरल बांड

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अब काले धन से होगी राजनीतिक पार्टियों की बल्ले-बल्ले –  इलेक्टोरल बांड

भारतीय राजनीति की विडंबना ही मानी जाएगी की पहले जिस सिस्टम में काले धन का उपयोग राजनेता बड़े स्तर पर करते थे,  लेकिन उन्हें यह काम चोरी-छिपे करना पड़ता था|

आपकी जानकारी के लिए बता दें की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार कोई भी दानदाता अगर किसी राजनीतिक पार्टी को 20000 से कम का चंदा देता है तो उसे स्वयं की जानकारी राजनीतिक पार्टी को देने की आवश्यकता या राजनीतिक पार्टी को चुनाव आयोग को उक्त दान की जानकारी मुहैया कराना जरूरी नहीं है|

राजनीति में बढ़ते काले धन की समस्या पर यूं तो बहुत विचार मंथन होता रहा है लेकिन क्योंकि ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां स्वयं ही इन कानूनों को तोड़ मरोड़ कर फायदा उठाते हैं इसलिए कभी भी इस दिशा में कोई भी कठोर कानून नहीं बन पाया |  वर्तमान बीजेपी सरकार ने बहुत ही शानदार मार्केटिंग के जरिए जनमानस में भ्रष्टाचार विरोधी होने का दम भर्ती रही है|  लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में काले धन को खत्म करने के बजाए एक बहुत ही चतुराई पूर्ण तरीके से एक ऐसा तरीका इजाद किया गया है जो कहने वह बोलने को तो पारदर्शिता बढ़ाता है लेकिन अंदर ही अंदर बहुत ही डरावना वह खतरनाक कानून है|  इस व्यवस्था का नाम है इलेक्टोरल बांड |

क्या है इलेक्टोरल बांड ?

देखने में अलग,  लेकिन एक तरीके से वर्तमान व्यवस्था में चलने वाले नोट से इसकी तुलना की जा सकती है | इसे भारत का कोई भी नागरिक खरीद सकता है या भारतीय कंपनियां भी खरीद सकती हैं | इसकी धारक राजनीतिक पार्टियां एक निश्चित समय के अंदर इसे बैंक को प्रस्तुत कर पैसा निकाल  सकती  हैं|

इलेक्टोरल बांड कैसे काम करेगा ?

इलेक्टोरल बांड 1000,  10000,  1 लाख,  1000000  वह एक करोड़ के गुणन में मिलेगा | यह कुछ निश्चित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं से लिया जा सकेगा | इसकी खास बात यह होगी कि यह आपकी पसंद की किसी भी राजनीतिक पार्टी को दिया जा सकता है और वह पार्टी इसे अपने निश्चित खाते में जमा कर पैसे की निकासी कर सकती है|

यह काले धन को बढ़ावा  कैसे देगा ?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अगर राजनीतिक पार्टी को कोई भी व्यक्ति या कंपनी ₹20000 से अधिक चंदा देती है तो राजनीतिक पार्टी को दानदाता की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है |  इलेक्टोरल बांड में  यह शर्त खत्म कर दी गई है |  मतलब राजनीतिक पार्टी को कहने को अपने दानदाता की वास्तविक जानकारी होते हुए भी अनजान बनी रहेगी वह दूसरी तरफ बैंक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी को दानदाता की जानकारी नहीं रहेगी |

राजनीति में पैसे का चलन बढ़ेगा –

इलेक्टोरल बांड के आने से  कोई भी प्रभावशाली,  धनवान व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा पैसे देकर राजनीतिक व्यक्ति या पक्ष को प्रभावित कर सकेगा तथा इसकी जानकारी बाहर किसी व्यक्ति को नहीं होगी |  गणतंत्र में इस तरीके  की व्यवस्था दीर्घकाल में बहुत ही घातक साबित होने की संभावना है |

 

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