पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम पर किताब लिखने वाले लेखक ने क्यों कहा, “मैं इस किताब का लेखक नहीं”?

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दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को आप कई बार रेडियो पर सुन चुके होंगे। इस रेडियो कार्यक्रम के जरिए पीएम मोदी देशवासियों से #रूबरू होते है। जिनमें अधिकतर सामाजिक मुद्दे पर मोदी बात करते है, जिसकी मार्केट में किताब भी आ चुकी है। पिछले साल 25 मई को मोदी के ‘मन की बात’: ए सोशल रिवॉल्यूश ऑन रेडियो किताब का राष्ट्रपति भवन में लोकार्पण किया गया था। जिसके लेखक बताए गए थे राजेश जैन, जो पीएम मोदी के पूर्व सहयोगी रहे है।

मैं मोदी के ‘मन की बात’ किताब का लेखक नहीं…

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राजेश जैन का मोदी के ‘मन की बात’ किताब से कोई लेना देना नहीं है। दावा तो यह भी किया गया है कि जबरन उनको किताब के लोकार्पण कार्यक्रम में लाया गया और मंच पर भाषण देने को कह दिया गया। कई वेबसाइट पर छपी खबरों के मुताबिक राजेश जैन ने स्वीकार किया है कि मैं खुद मोदी के ‘मन की बात’ किताब का लेखक नहीं हूं और लेखक की जगह अपना नाम देखकर चौंक गया था। सवाल उठता है आखिर मोदी के ‘मन की बात’ किताब के लेखक राजेश जैन आखिर क्यों मना कर रहे है कि वो लेखक नहीं है?

राजेश जैन का दावा है कि मुझे पीएमओ(प्रधानमंत्री कार्यालय) ने किताब के लोकार्पण कार्यक्रम में आने को कहा था। जब मैं वहां पहुंचा तो पाया कि किताब के लेखक के तौर में मेरा नाम छपा है। हालांकि जैन ने ये भी दावा किया है कि मैंने कार्यक्रम के दौरान इस बात को स्पष्ट कर दिया कि “मैं किताब का लेखक नहीं हूं।” इसके बाद भी “पता नहीं क्यों पीआईबी की वेबसाइट और narednramodi.in पर मेरा नाम लेखक के तौर दिखाया जा रहा है।”

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