क्या डाटा विहीन हो गयी है सरकार? क्या उद्योगपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया के कारण देश के प्रधानमंत्री दबाव में हैं ?

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Farmers Protest, Death Count of Farmers

क्या डाटा विहीन हो गयी है सरकार? क्या उद्योगपतियों द्वारा नियंत्रित मीडिया के कारण देश के प्रधानमंत्री दबाव में हैं ?

क्या देश की सरकार जानबूझकर किसान आंदोलन के दौरान हुई मौतों को नजरअंदाज कर रही है ? पिछले 70 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन मैं अभी तक 200 से अधिक किसानों की मृत्यु हो चुकी है जिसमें दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या भी की है |

यह खबरें सार्वजनिक मंचों पर वह सोशल मीडिया पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन आज जब संसद में आज एक सांसद द्वारा पूछा गया कि क्या सरकार के पास किसान आंदोलन के दौरान हुई किसानों की मौतों का आंकड़ा है ? इसपर सरकार के जवाब से किसानों को लेकर उसकी सोच उजागर होती है | सरकार के अनुसार उनके पास वर्तमान में 2 किसानों की मौत की ही जानकारी है

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि एक तरफ जहां सरकार डिजिटल इंडिया का नारा देकर उसे लगातार प्रसारित प्रसारित कर रही है | वही इतने महत्वपूर्ण समय में एक ऐसा आंदोलन जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी है, में हुई कुल मौतों पर सरकार की अनभिज्ञता निश्चित ही सवार उठाती है |

या तो सरकार जानबूझकर वह डाटा साझा नहीं करना चाहती है या फिर वास्तविकता में ही लोगों में उपजे असंतोष को दबाने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर “डाटा उपलब्ध नहीं है” कह कर अपना पल्ला झाड़ना चाहती है| यह निश्चिंत ही लोकतंत्र के लिए खतरनाक है |

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