किसान आंदोलन में सत्याग्रह की असली तस्वीर देखनी है तो पहुंचे शाहजहांपुर बॉर्डर |

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राजस्थान – हरियाणा के शाहजहांपुर बॉर्डर पर राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए किसान, उनके संगठन व प्रतिनिधि बड़ी संख्या में 11 दिसंबर से मौजूद हैं | वहां मौजूद किसान व् नेताओं से बातचीत के कुछ अंश –

सादुलशहर, गंगानगर निवासी मनदीप सिंह जी के अनुसार जनता व सरकार का रिश्ता मालिक और नौकर का है लेकिन आज की तारीख में नौकर खुद को मालिक समझ कर बैठा है, व तानाशाही तरीके से अपने मालिक का आदेश मानने से मना कर रहा है | इसी बात पर गंगानगर निवासी बलजीत सिंह ने भी अपना समर्थन देकर कहा की जनतंत्र में जनता ही असली मालिक है व हमारे सेवक ज्यादा दिनों तक हमारी बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं|

मुकुंदपुरा, सीकर निवासी कान्हा राम जी ने सवाल किया की बीजेपी सरकार ने देश हो ऐसे किस आर्थिक संकट में डाल दिया है की उसे देश को बेचने की जरूरत आन पड़ी है|

सादुलशहर निवासी इकबाल सिंह जी का कहना था की किसान हर तरीके से सरकार की मदद करना चाहते हैं, लेकिन दरख्वास्त की कि सरकार कृपया कर देश को उद्योगपतियों को ना बेचे |

किसान सभा स्टेट कमेटी सदस्य रुडसिंह महला के अनुसार यह लड़ाई आम जनता व पूंजीवाद के बीच में है| इसे चीन जैसे गैर-लोकतान्त्रिक देशों को छोड़कर बाकी पूरी दुनिया में एक प्रयोग के तौर पर देखा जाना चाहिए | रुडसिंह के अनुसार यह कानून किसान द्वारा बिजनेसमैन के साथ कॉन्ट्रैक्ट के अनुरूप फसल की पैदावार में होने व अन्य किसी वाद विवाद के चलते हुए नुकसान में एसडीएम की मदद से किसान की जमीन के कुर्की के आदेश भी दिए जा सकते | उनके अनुसार यह आंदोलन कृषि बिलों को वापस लेने के बाद में भी देश में आगे की शासन व्यवस्था सुचारु तरीके से चले, उसके लिए भी संगठन के नेता आपस में मिलकर बाद में निर्णय करेंगे |

स्टेट किसान सभा कमेटी के सदस्य मोहन सिंह फौजी जी ने स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार C2 लागू करने की बात कही |

स्टेज कोऑर्डिनेटर व कमिटी सदस्य डॉ संजय माधव ने मंच संचालन किया वह विभिन्न गणमान्य किसान नेताओं ने मंच पर अपने विचार रखें | मीटिंग में पूर्व विधायक अमराराम व राजस्थान में जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील भी उपस्थित रहे|

आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों द्वारा समर्थन में आने वाले लोगों के लिए लंगर की व्यवस्था सुचारू व्यवस्था मौजूद थी | किसान आंदोलन में जाती व धर्म को भूलकर प्यार व आत्मीयता के जो रंग दिखे वह निश्चित ही इस किसान आंदोलन को एक अद्भुत आंदोलन बनाता है, जिससे कि आने वाले समय में होने वाले विभिन्न आंदोलनों को सीख लेने की जरूर ही आवश्यकता पड़ेगी |

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