मोदी को भारत की वैश्विक प्रशंसा बहुत पसंद है , मगर आलोचना के कारण नाराज हो जाते हैं।

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प्रशंसा सरकार को स्वीकृत मगर आलोचना अस्वीकृत क्यों?(Appreciation accepted by the government, but why the criticism is rejected?):- मोदी अपनी प्रमुखताओ के साथ, भारत को जो कभी नहीं देखा गया पुनरुत्थान का वादा करते हैं। केवल 2 सप्ताह में,हमने ब्रिटिश उच्चायुक्त को सम्मन के लिए बुलाया क्योंकि भारत में चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन पर उनकी संसद में चर्चा की और इस बात पर नाराजगी जताई।

भारत के राष्ट्रीय गौरव पर कई बार घाव दिए गए(Many times wounds were given to India’s national pride):- 1990 के दशक में, जब भारत कश्मीर और पंजाब में एक साथ विद्रोह और संकटों से जूझ रहा था तब से, भारत की रेटिंग में सुधार हुआ। लेकिन पिछले 9 वर्षों में, यह रेटिंग अच्छे नौ अंकों से गिर गई है। जो कि मुक्त श्रेणी के पीछे लाने और आंशिक रूप मुक्त होने के बीच का अंतर है। राष्ट्रीय गौरव का तब भी खून  बह रहा था, जब स्वीडन केवी डीएम फाउंडेशन ने नमक – शकर को अपने कब्जे में ले लिया और भारत को चुनावी निरंकुश घोषित कर दिया।यह हमारे हैं क्योंकि इसमें विदेशी और विदेशी वित्त पोषित नींव है| भारत में किसान आंदोलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टुडे अपने सहानुभूति पूर्ण बयानों के कारण किसानों के समर्थन में नजर आए | इसके अलावा अन्य विदेशी कार्यकर्ता वर्ग प्रमुखत: थ्रेटा थुनबर्ग, कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरीस ,गायिका रिहाना अभिनेता सुसान सरंडन ने भी किसान आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया।

भारत की आलोचना करने वाले विदेशी कौन?(Who are the foreigners who criticize India?):- भारत की आलोचना करने वाले यह विदेशी कौन है एंव हमारे आंतरिक मामलों में इन्हें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उपलब्धियां(India’s achievements at international level):- भारत ने ‘दावोस 2007’ में ‘इंडिया एवरीवेयर’ को थीम घोषित करने के लिए विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के साथ मिलकर काम किया था। ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में भारत की स्थिति को बदलने में स्वयं प्रधानमंत्री का बहुत बड़ा योगदान है। इसके साथ ही भारत के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग में भी वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं  वैश्विक स्तर पर  भारत की रैंकिंग में भी क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।

आलोचना पर आक्रोश क्यों?(Why angry at criticism?):- संक्षेप में कहे की यदि मोदी जी विदेशी निकायों से सिर्फ प्रशंसा ही स्वीकार्य है, तो आलोचना पर इतना आक्रोश क्यों?आज विश्व भारत की वर्तमान नेतृत्व को स्वीकार करता है।यहां तक की मैडम तुसाद ने भी मोदीजी की मोम की प्रतिमा लगाई है और दुनिया की भारत पर नजरे टीकी हैं। इतना सब होने के बावजूद भी मोदी जी अलोचनाओ से नाराज क्यों हो जाते है?

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