किसानों द्वारा दिल्ली बार्डर पर मनाया जाएगा बैशाखी पर्व और खालसा स्थापना दिवस।

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बैशाखी पर्व और खालसा स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली बार्डर पर किसान संघ मोर्चा द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। किसान संघ मोर्चा ने किसानों से निवेदन किया है कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोग हिस्सा लें। इसके अलावा किसान मोर्चा ने यह भी कहा है कि बढ़ते कोविड केस को ध्यान रखते हुए कोविड संबन्धित सभी नियमों का पालन किया जाएगा और सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए ये कार्यक्रम 14 अप्रैल को सम्पन्न होंगे।

बैशाखी पर्व और खालसा स्थापना दिवस

  • बैशाखी पर्व सिक्ख समुदाय द्वारा मनाया जाता है, यह पर्व सुख और समृद्धि का प्रतिक है। इस माह में रबी फसल काटी जाती है जो की सुख और समृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा यह पर्व नए वर्ष के आगमन की खुशी में भी मनाया जाता है।
  • इस दिन लोग अपने मित्रों , घर वालों को बधाइयाँ देते हैं, इसके अलावा लोग लोक – नृत्यों और मेलों का भी आयोजन करते हैं।
  • बैशाखी पर्व के दिन ही सिखों के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। खालसा का अर्थ होता है योद्धा, गुरु गोबिन्द सिंह ने इस पंथ की स्थापना आम जनता को मुगलों के अत्याचार से बचाने के लिए की थी।

बता दें, विभिन्न राज्यों के किसान और किसान संघ मोर्चा, केन्द्रीय सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ बीते वर्ष से धरना दे रहे हैं। यह कार्यक्रम दिल्ली के विभिन्न बार्डरों टिकरी, सिंधु, गाजीपुर तथा अन्य बार्डर पर आयोजित होंगे। इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और खेल संबन्धित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे।

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